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शनिवार, 19 मई 2018

दोहे ..

हुनर  तुम्हारा सादगी, नैना तीक्ष्ण कटार ।
देखा जबसे आपको, हुआ तभी से प्यार ।।

दिल चाहे इक आपको, मन क्यों उड़ता जाय ।
देह   हुई   है   बाबरी, जगत दिया बिसराय ।।

अन धन  सब अर्जित रहे ,मिले  न एक पल चैन ।
त्राहि त्राहि  पुकार रहे  ,  मन  मानस  बैचैन ।

सजन बिन सिंगार झूठे, हिवङे री पूकार
  दिन महिने बरस छूटे ,नैन करे तक़रार।

राम  तुम्हारा सच कहे  ,कण कण में है राम ।
सच की रहा चल  रहे ,सफल करे सब काम।।

मन  मेरे  कान्हा  बसे , तन में  बसे  राम ।
चैन ना हीं  बिन कान्हा, मिले राम आराम ।।

राम नाम स्मरण करे  , सफल  बने सब काम  ।
दू :ख दर्द हरण करे  ,  जन  मानस के राम ।।

राम  नाम  मृदु  रस भरा,राम हृदय सुख सार ।
वर्णन कब किससे हुआ,यह राम रमा संसार ।।
-अनु 

1 टिप्पणी:

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