समर्थक/Followers

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

सफ़र


कभी हमारी मुलाक़ात होगी 
अनजानी अनचाही होगी 
ज़िंदगी  की  एक नई शुरुवात होगी 
 दर्द-ए-ग़म  कम न होगें 
फिर  भी खुशियाँ कम  न होंगीं  
अब मैं, मैं नहीं हम होगें 

-अनीता सैनी 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,