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रविवार, 23 सितंबर 2018

समय का तख़्त


हवाओं ने लहरायें ग़ुमनाम मंसूबे 
हाथों ने फ़िर तेरा नाम संवारा 
भूल चुकी  इश्क का गलियारा 
धड़कनों ने फ़िर तेरा नाम पुकारा 


बेजान सांसे सुलग़ उठी 
मिला अरमानों को  सहारा 
हाल -ए -दिल की सुनी दास्तां 
समय के तख़्त ने फ़िर पुकारा 


मोहब्बत का  अंदेशा रहा हमें 
ख़ैरियत लिख देते अल्फाज़  में 
 क्यों बंदिशे लगा रखी धड़कनों पर 
खाली लिफ़ाफ़ा भेज देते याद  में 

          - अनीता सैनी 

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