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सोमवार, 24 सितंबर 2018

बटोही

      
अब के गुजरो
उस राह से  
जरा ठहर जाना 
पीपल की छाँव में 
तुम पलट जाना 
उस मिट्टी के ढलान पर 
बैठी है उम्मीद 
साथ उस का निभा देना 
तपती रेत पर डगमगाएगें कदम 
तुम हाथ थाम लेना 
उसकी जमीरी ने किया 
ख्वाहिशों का क़त्ल 
तुम दीप अरमानों का जला देना 
नाक़ाम रही वो राह में 
ना -उम्मीद तो नहीं 
बटोही हो तुम राह के 
मंजिल टक पहुँचा देना |

-अनीता सैनी 

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