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शनिवार, 8 सितंबर 2018

कह मुकरियाँ छंद

                           

प्रथम प्रयास...त्रुटि हेतु माफ़ी। 



     छुपे   राज  करे  उजागर,
     कर्म   पथ    उसे   दिखाकर ।
     हर   मानव   को   राह   दिखाय।।
     ऐ ! सखी  सूरज ,ना  सखी  समय।


     देख   मनुष्य  खूब   ललचाये,
     साथ  रहनें   को   वह   तिलमिलाये।
     आयें   द्वार  पर  खोयें   मति।।
      ऐ ! सखी  साजन, ना सखी सम्पत्ति।


    याद  में  उसकी  नैना  बरसे,
    सुबह  सवेरे  दिल  ये  तरसे।
     प्रित  में  उसकी  सुध  बुध  खोई।।
     ऐ ! सखी साजन, ना  सखी भाई।


   अपनी  तपन  किसे  बताये ?
   ज्योंति  ज्ञान  की  वह  जलाये।
    सूरज   सा   उजियारा    धरु।।
   ऐ ! सखी  दीपक?  ना सखी गुरु।

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