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रविवार, 16 सितंबर 2018

लौट आते तुम

   लौट आते तुम 

अहसास  के  समंदर  में,
डूब  रहा  मन,
लौट आते   तुम,
अपने पन की कश्ती पर।

जिंदगी के भंवर में,
उलझ न जायें, 
यही सोच फटकार रहीं  तुम्हें,
कलेजा तङपता रहा,
क़दमों को मंजिल मिले,
यही सोच दौङा  रहीं  तुम्हें। 

वही  आंगन,
वही  द्वार,
पहुंचीं  न  दिल तक,
माँ की पुकार,
शब्दों का  रहा व्यवहार,
दिल में वही  तक़रार,
समझ  न  पाया  बेटा,
एक माँ का प्यार। 

इंतज़ार  में  सांसें  छूटी,
यादें  वहीं  खूँटी   पर  टूटी 
बेटे  के  प्यार  में,
माँ  भी   टूटी ।

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