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सोमवार, 15 अक्तूबर 2018

रुह की रानी


                                                     
उमंगीत मन
चंचल  क़दम
रुहानी मुस्कान
शब्द सरस में  संलग्न
कर क़मर इतराते
शिकायत  जमीं  पर..... 

मन मोही मासूम
झिलमिल अदा
मंद  मंद  मुस्काना
इठलाता  यौवन
एक नजर नजराना
नजरों का चुराना. .....

मोह  रही  मन
दिलकश  लज्जाना
खनक  रहे  गुमान  के  घुँघरु
लहरा रही   गुरुर की  चोटी
घर नहीं,  देश   संवार  रही
हर  घर  से  उठा  रही  कचरा
खामोश  रुह  की    रानी....  ...

          - अनीता सैनी 

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