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मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

प्रतियोगिता का ठाठ


                                            
वक़्त   के   साथ  दौड़ 
 लगाती   जिंदगी  की 
 वक़्त   से  आगे 
 निकलने  की चाह,  
निगाहों    से   ओझल   
  होते   गंतव्य
की   ओर   बेसुध   
जिंदगी   का  दौड़ना ,
कभी    न   पुरी   होने  
 वाली  लालसा, 
के  उद्वेग  से   मन  
अपनों  ओर  सपनों, 
को   कुचलता  ऐसे
  गंतव्य   पर   मिला  
जहा   पश्चाताप   
उस  की राह  ताक रहा |

  मासूमियत  से  सराबोर  
  खिल  खिलातें   फूल 
 अभी  महके  भी  नहीं  की    
 उन्हें   जिंदगी  का  कड़वा  सच्च   
 अनुभव  की  खोखली  छाप से  
मापन का सिलसिला  प्रारंभ  किया  |

   नन्हें  क़दमों   ने   
    कुछ   डग  न भरे, 
  कि  उसे  जिंदगी  की  
    रेस  का घोड़ा 
   बना  मैदान  में  उतार   दिया  |

   उम्मीद  की  पोटली  
 उनके  शीश  पर  सवार ,
  खुद  न  चलने  का  बहाना 
  उसे  दौडा   दिया |

 अपनी    नाकामी   छुपा  
  रेस   पर  दवा  लगा 
 खुद  के  कंधों  का  वज़न 
 मासूमो   पर  ढो  दिया |

जिसने  धूप   और  छाँव  में  
   फर्क  ही  न किया, 
  उन्हें   जिंदगी  में  इनके   
  मायने बता  दिये |

   क़िताबी  ज्ञान  को  शिक्षा 
   मासूमों की जिंदगी को उलझा 
  अनुभव  को दरकिनार किया |

  कंधों  पर बढ़ता वज़न  
 जिंदगी की दौड़ लगाते मासूम 
 यही  दास्तां  कह  रहे  |








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