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रविवार, 9 दिसंबर 2018

सहादत को सलाम




ग़मों  से  तिलमिलाती   जिंदगियाँ ,  कभी  ग़मों  से  मिल  कर  देखिये , 
  पिता  के  प्यार  से  महरुम  बच्चे , जवानों   के  परिवार  में  देखिये |


मिट्टी  में  खुशबू , हवाओं   में  अपनापन  तलाश  कर  देखिये , 
मोहब्बत  आज भी  पनपती  , जवानों   से मोहब्बत  करके  देखिये |


मोहब्बत लुटा कर,  लुटा देते  जिंदगी, ज़माने में  ऐसे  मेहमान देखिये, 
   ज़िंदा  रहते   हुए,   फिर  कभी  न  मिलने  का  अहसास  देखिये |


गुरुर  में   हिलोरे  मार  रहा  मन ,  क़दमों   का  जुनून   देखिये,
रग   रग  में    दौड़ता   देश   प्रेम,   वरदी   को  छू   कर   देखिये |


ठंड  की  ठिठुरन , गर्मी   की   तपन,  प्रकृति  का  ऐसा  रुप  देखिये, 
कैसे होती मुल्क़  की हिफ़ाज़त जवानों की आँखों  में झाँक कर देखिये ? 


मोहब्बत  का  फ़लसफ़ा ,   शहीद   की   तड़पती  रुह  से  पूछिये, 
आँखों  में   गुज़री   रात  ,  जिंदगी   का    हसींन   मंज़र   देखिये |


3 टिप्‍पणियां:

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,