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गुरुवार, 17 जनवरी 2019

याद - ए - माज़ी




                                       

नज़ाकत   भरी   निगाहों  से 
पिला  दिया  दर्द- ए - जाम,  जिंदगी  के मयख़ाने में,
ज़िक्र   हुआ  दिल   की  महफ़िल  में, 
रुख   किया  यादों   के   तयखाने    का   |


 नाराज   नहीं   तुझसे   ए - जिंदगी 
उलझ  गई   लम्हों   के   तयखाने  में ,
एक  घूंट  जाम - ए - जिंदगी,  
मदहोश हो गए, जिंदगी के मयख़ाने  में |

  मोहब्बत की डगर तलाश रहा  मन 
 हाथों  में    जाम - ए  - जिंदगी ,  
क्यों   हुआ  वो  मोहब्बत   पर  फिदा  ?
नसीब  ही   उस    का   बेवफ़ा     रहा |


फिर   जी   उठी    इसी  बहाने  से 
तस्वीर  उभर  आई  याद - ए - माज़ी   जिंदगी के तयखाने   में, 
महक़  उठी   फ़िजा  में  हिज्र  की  शाम 
 जाम -ए -  जिंदगी,   यादों  के   मयखाने  में |

                          -अनीता 

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-01-2019) को "सेमल ने ऋतुराज बुलाया" (चर्चा अंक-3221) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. क्यों हुआ वो मोहब्बत पर फिदा ?
    नसीब ही उस का बेवफ़ा रहा |.....वाह!

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  3. आदरणीय विश्व मोहन जी आप का बहुत बहुत आभार उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
    सादर

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  4. प्रिय कामिनी जी -शुभ संध्या सखी
    आप को बहुत सा स्नेह
    सादर

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  5. बहुत ही हृदयस्पर्शी सृजन ।

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    1. प्रिय सखी मीना जी -आप का सह्रदय आभार उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
      सादर

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (29-07-2019) को "दिल की महफ़िल" (चर्चा अंक- 3411) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,