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शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

बोलता ताबूत



                     

         अमन  का  पैगाम,  लहू  से  लिख  दिया,        
        दिए  जो  ज़ख्म,   सीने  में  छुपा   दिया |


       मोहब्बत  का  पैगाम,  पैगंबर  बना   दिया,
    दर्द में डूबा दिल, एक बार फिर मुस्कुरा दिया |


   शहीद का दर्जा, चोला  भगवा  का पहना  दिया,
खेल  गए वो  राजनीति,  मुझे ताबूत में  सुला  दिया | 


   घर  में  बैठे  आंतकी, मुझे  पहरेदार  बना  दिया,
   हाथों   में  थमा   हथियार,  लाचार  बना  दिया  |


     दीन   हूँ  या  हीन,  कटघरे  में  खड़ा  कर  दिया,
  खोल   रहा   था  ख़ून,  मुझे  झेलम   में  डूबों   दिया |

                           -अनीता सैनी 

30 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब! ताबूत में ख़ामोशी का समंदर समा गया है। लहर उठेगी अपना असर दिखायेगी ज़रूर।
    वीर जवानों को सादर श्रद्धाँजलि।

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    1. उसी इंतज़ार में कई आँखें तथरागई सर |कब और कब तक | आप क़लम के सिपाही हो सर | नेताओं को जागना होगा ,आम जन को जगाना हो |
      सादर

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  2. उनके लहू से लिखा यही पैगाम वतन के दुश्मनों का ताबूत बनेगी और आखिरी कील भी।

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  3. कितना कुछ सिमटा हुआ है इस एक खामोश ताबूत में ...
    नमन सिर्फ नमन है मेरा ...

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  4. खामोश लमहों के दरख़्त पर
    ज़िंदगी के खामोश पल

    कोटि कोटि नमन

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  5. घर में बैठे आंतकी, मुझे पहरेदार बना दिया,
    हाथों में थमा हथियार, लाचार बना दिया |

    बिलकुल सही सखी ,नमन है वीरो को और उन्हें जन्म देने वाली वीरांगनाओ को

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  6. बहुत खूब सखी ।आँखें नम हो गई।

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  7. खोकर वीर सपूतों को हर आँख नम हैं
    शत् शत् नमन 🙏

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  8. शहीद का दर्जा, चोला भगवा का पहना दिया,
    खेल गए वो राजनीति, मुझे ताबूत में सुला दिया |
    प्रिय सखी अनिता -- बोलते ताबूत के स्वर बड़े मर्मान्तक हैं जो ह्रदय को बींध निकल जाते हैं | शायद समय इन प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम हो | सस्नेह आभार इस हृदयस्पर्शी सृजन के लिए और उन वीर जवानों के कोटिश नमन और वन्दन | |

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    1. प्रिय सखी रेणु जी -बहुत सा स्नेह आप को |सही कहा आप ने कुछ प्रश्नों के उतर समय आने पर समय ही देता है |बहुत अच्छा लगा आप ब्लॉग पर पधारे |वीर अमर शहीदों को नमन |
      सादर

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  9. घर में बैठे आंतकी, मुझे पहरेदार बना दिया,
    हाथों में थमा हथियार, लाचार बना दिया
    सटीक अभिव्यक्ति....
    शहीदों को श्रद्धांजलि

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    1. सस्नेह आभार सखी |
      अमर शहीदों को नमन |
      सादर

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  10. घर में बैठे आंतकी, मुझे पहरेदार बना दिया,
    हाथों में थमा हथियार, लाचार बना दिया |
    .......नमन है वीरो को

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    1. सह्रदय आभार आदरणीय |
      नमन वीरों को |
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,