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बुधवार, 3 अप्रैल 2019

मन वीणा यूँ बजी आज


                                  

                      फैला उम्मीद का दामन, 
                      मन  वीणा  यूँ  बजी  आज, 
                उमंग के  साज़  सजे सब  दिशाओं  में, 
                      पिया  के  रंग  में   रंगी  आज |
                  
                        सजा  आँखों  में  सुरमा,  
                       ओढ़   चुनरियाँ    लाल, 
                       नेह   प्रीत   में  खो जाऊँ, 
                      फिर  बन  जाऊँ  दुल्हन  आज|

                        रीति-रिवाज  का पहन  चोला, 
                        मंद-मंद   मुस्काऊँ  आज,    
                         वक़्त की डोरी खोलूँ  हाथों से, 
                       फिर सजाऊँ  जीवन का  साज़ |

                            बाट  तुम्हारी   जोहती, 
                        बेचैन हृदय में  छिपाये  राज़, 
                        भूल न  जाना  बात  मिलन की, 
                             राह   निहारे   गोरी  आज |
    
                                  - अनीता सैनी 

36 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (05-04-2019) को "दिल पर रखकर पत्थर" (चर्चा अंक-3296) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  2. ओहह्होओ... बहुत बहुत सुंदर प्रिय अनीता👌👌👌
    बहुत सुंदर रचना👍👍
    पिया मिलन की आस में गोरी रह-रह झाँके द्वार
    सुखद स्मृति पट खोले सोचे कब आयेंगे मेरे प्यार

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    1. प्रिय श्वेता बहन तहे दिल से आभार आप का उत्साहवर्धन के लिए 🌷🌷🌷🌷
      सादर

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  3. उत्तर
    1. प्रिय अनुराधा बहन तहे दिल से आभार आप का
      सादर

      हटाएं
  4. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 04/04/2019 की बुलेटिन, " चल यार धक्का मार , बंद है मोटर कार - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    उत्तर
    1. सहृदय आभार आदरणीय ब्लॉग बुलेटिन में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  5. बाट तुम्हारी जोहती
    बेचैन हृदय में छिपाये राज
    भूल न जाना बात मिलन की
    राह निहारे गोरी आज
    मिलन के पलों की मधुरता को संजोती मधुर रचना प्रिय अनीता | शब्द शब्द नेह रस झरता प्रतीत हो रहा है | सुंदर चित्र रचना की शोभा बढ़ा रहा है | ये जोड़ी और प्रेम अक्षुण और अटल हो |मेरी दुआ और कामना | हार्दिक प्यार के साथ |

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    1. प्रिय रेणु दी तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  6. बहुत सुंदर रूमानी रचना

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  7. आपके मन की वीणा सदैव बजती रहे। शुभकामनाएं व आशीष ।

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  8. बेहद खूबसूरत रचना अनीता जी । हार्दिक शुभकामनाएं ।सस्नेह ।

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  9. अनीता जी, सुंदर भावपूर्ण रचना के लिए आपको बधाई। सादर।

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  10. वाह..क्या बात है
    बहुत सुंंदर।

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,