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बुधवार, 15 मई 2019

प्रस्थान

                                             
प्रस्थान 
यादों के गलियारे  में दौड़ते वक्त का
दृश्य में अदृश्य भटकते भावों का
मौन में  मुखरित  हुए स्नेह का 
हालात के ग़लीचे में दफ़्न ममता का 

प्रस्थान 
भारी मन ,  रुँधे   कंठ  का 
वक्त के पड़ाव का  आँकलन 
करने में  असमर्थ  साँसों   का 
नम  आँखों में  दौड़ते परिदृश्य का 

प्रस्थान 
 जोहड़  से रूठें   तरु - तरूवर  का 
सरिता तट पर  चहचहा   रहे परिंदों का 
कल - कल बहते जल का 
  उलझे   स्वप्न,  मन में  उठे प्रश्न  का 

प्रस्थान 
हैंगर  में टगें कुछ रिश्तों  का  
जरुरत के वक्त झाड़ने की मशक्क़त  का 
हवा में अपनेपन की नमी का 
नमी में  भीनी-भीनी  महक से महके 
समाज के एक  हिस्से   का  
जहाँ  स्नेह के बीज 
पल-पल अंकुरित हुआ करते थे|

             - अनीता सैनी 

32 टिप्‍पणियां:

  1. अप्रतिम भाव लिए अभिनव सृजन..., बेहद खूबसूरत👌👌

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    1. प्रिय सखी मीना जी शुक्रिया आप का
      सादर

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  2. प्रस्थान
    यादों के गलियारें में दौड़ते वक्त का
    दृश्य में अदृश्य भटकते भावों का
    मौन में मुखरित , हुए स्नेह का
    हालात के ग़लीचे में दफ़्न ममता का
    .
    अद्भुत मैम।
    .
    समाज के एक हिस्सा का
    जहाँ स्नेह के बीज पल-पल अंकुरित हुआ करते थे|
    बेहतरीन रचना।

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    1. तहे दिल से आभार आदरणीय निश्छल जी आप का
      सादर

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  3. उत्तर
    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी नितु जी
      सादर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल गुरुवार (16-05-2019) को "डूब रही है नाव" (चर्चा अंक- 3337) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
      सादर

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  5. अनछुए विषयों पर विचारणीय अभिव्यक्ति।


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    1. सहृदय आभार आदरणीय रविन्द्र जी
      सादर

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    1. प्रिय सखी शुभा जी तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  7. बहुत खूब प्रिय अनीता | एक दुर्लभ विषय पर सार्थकी चिंतन भरी रचना | प्रस्थान यानी चले जाना | सचमुच जो प्रस्थान कर गया वो कल का सुखद अनुभव था | हर प्रस्थान यादों की अनमोल धरोहर है | हार्दिक शुभकामनायें और प्यार |

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    1. प्रिय सखी रेणु जी तहे दिल से आभार आप का सुन्दर समीक्षा के लिए

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय सखी उर्मिला जी
      सादर

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  9. अनुपम अभिव्यक्ति¡
    कैसे जीवन के अभिनव पल प्रस्थान को चल पड़ते कैसे आस पास के कोमल दृश्य भावनाएं सब चढ़ाव से उतार को अग्रसर होती है ..।
    बहुत शानदार प्रस्तुति।

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    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी कुसुम जी सुन्दर समीक्षा हेतु
      सादर

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  10. ...प्रस्थान तो शाश्वत सत्य है, होना ही चाहिए।परंतु हौसलों का प्रस्थान नहीं होना चाहिए. बहुत बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति 👏 👏

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    1. जी शुक्रिया आप का माँ सारदे आप का हौसला बनाये रखे
      सादर

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  11. बहुत ही सुंदर.... सखी ,लाज़बाब

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    1. प्रिय सखी कामिनी जी शुक्रिया आप का
      सादर

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  12. बेहतरीन प्रस्तुति सखी

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    1. प्रिय सखी अनुराधा जी तहे दिल से आभार सखी
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,