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बुधवार, 29 मई 2019

जब मानव बना प्रदूषण का शिकार



                

   मैं  धरा, माँ  सृष्टि   ने  मृदुल  कल्पना  पर 
  धर  सुन्दर  सुमन  स्नेह  भाव  से   किया   श्रृंगार 
अमूल्य  धरोहर  से  सजा आँगन
 छटा  निराली  प्रभात  की 
निशा आच्छादित  नील  गगन 
 हृदय  में   हरितमय  लाली 
प्रीत  पथ  की  नाज़ुक  डोर  पर 
 अंतर्मन  से  अर्पित  माँ  का  निर्मल दुलार 

करुणा  शिखर  पर  उपजी 
वात्सल्य  की  करुण  पुकार 
 गढ़े  पदचाप  मनु  के 
खिली अधरों पर   मधुर  मुस्कान  
शीतल  नीर , पवन के झोंके 
दिया  सृष्टि  ने  मानव  को
 अन्नपूर्णा  का पूर्ण  भंडार 

 अति स्नेह  ने   किया  जर्जर   
 प्रकृति  का   दिया  उपहार 
कृत्रिमता   से  गहन  प्रेम  
 प्रकृति  का  बरबस   उपहास 
मोह  में  बना   निठल्ला    मानव 
 प्रदूषण   का   हुआ  शिकार 

कृत्रिमता  की ललक , मशीनीकरण 
से  बढ़ा उद्योगों  का  विस्तार,
 प्रदूषित  वायु  का   अंबर 
ग्लेशियर  का  प्रबल  प्रवाह 
सागर में  पल -पल  क्षीण धरा की काया 
रचा   प्रलय   का   तांडव 

 साँसों   पर  दूषित  वायु  का  आधिपत्य  
 उपजे  तन - मन  में  अनचाहे  कीट 
 हुईं   ध्वनियाँ   स्थूल
 पल -पल  बहे   पानी  पश्चाताप  का  
  छलका  नयनों  से नीर
 अब  हृदय  में  सुलगी 
  प्रकृति  के  स्नेह  की  पावस  पीर. .....

    - अनीता सैनी

34 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (31-05-2019) को "डायरी का दर्पण" (चर्चा अंक- 3352) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
      सादर

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    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी दीपा जी
      सादर स्नेह

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  3. बेहतरीन रचना सखी,सादर

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  4. उत्तर
    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी अनुराधा जी
      सादर स्नेह

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  5. वाह। मृदुल सृजन। भावों की शीतल आधारशिला।

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  6. कृत्रिमता की ललक , मशीनीकरण
    से बढ़ा उद्योगों का विस्तार, प्रदूषित वायु
    ग्लेशियर का प्रबल प्रवाह
    सागर में पल -पल क्षीण धरा की काया
    रचा प्रलय का तांडव

    बेहतरीन सृजन ,सखी

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    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी कामिनी जी
      सादर स्नेह

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  7. अनीता जी आपने तो प्रदूषण को भी साहित्यिक रस से सराबोर कर दिया. बेहतरीन रचना 👌 👌

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    1. प्रिय सखी सुधा जी तहे दिल से आभार
      सादर स्नेह

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  8. प्रदूषण पर सार्थक चिंतन की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करती अभिव्यक्ति।

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    1. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
      सादर

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  9. सुन्दर एवं सार्थक सृजन प्रिय अनीता !

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    1. सस्नेह आभार प्रिय सखी मीना जी
      सादर स्नेह

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  10. अनिता दी,प्रदूषण की भयावहता को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया हैं आपने।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय बहन ज्योति जी
      सादर स्नेह

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  11. यथार्थ को आवाज दी आपने
    सुंदर

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    1. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
      सादर

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  12. उत्तर
    1. तहे दिल से आभार प्रिय रितु दी जी
      सादर स्नेह

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  13. सार्थक¡¡¡ समय का भयावह चित्र।
    अप्रतिम लेखन।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय कुसुम दी जी आप का स्नेह यूँ ही बना रहे
      सादर स्नेह

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  14. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    ३ जून २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. सस्नेह आभार प्रिय श्वेता बहन पाँच लिंकों में मेरी को स्थान देने हेतु
      सादर

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  15. उत्तर
    1. तहे दिल से आभार आदरणीय भास्कर भाई
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,