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शनिवार, 22 जून 2019

अमृता एक औषधि



भटक  रही, दर-दर  देखो !
 स्नेह  भाव  से  बोल  रही, 
 अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,
सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|

विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,
सर्वगुणों  का  श्रृंगार   किये 
अमृता  कहो   या  गिलोय, 
संजीवनी  का  अवतार  लिये  |

आयुर्वेद  ने  अर्जित  की,
अमूल्य  औषधि  पुराणों  से,
महका, मानव  उपवन  अपना,
अमृता  की  झंकारों  से |

चेत  मानव  चित   को  अपने ,
न  खेल बच्चों की  किलकारी से,
हाथ में औषधि लिये खड़ी,
प्रकृति  जीवन पथ की पहरेदारी  में  |

- अनीता सैनी 

35 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति का सानिध्य हमें सुखमय जीवन का आधार प्रदान करता है.
    औषधीय जड़ी-बूटियों से समृद्ध है भारत की धरती जिसके लिये जागरुक होना ज़रूरी है.

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (24-06-2019) को "-- कैसी प्रगति कैसा विकास" (चर्चा अंक- 3376) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
      प्रणाम
      सादर

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  3. प्रकृति ने मनुष्य को समस्त निधियों से आभूषित किया है। जरूरत है मनुष्य उसके साथ सहजीवी बने। गिलोय की अमृत शक्तियों से साक्षात्कार कराती सुंदर कविता।

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    1. तहे दिल से आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी हेतु
      प्रणाम
      सादर

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  4. वाह वाह वाह बहूत सुन्दर

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
      प्रणाम
      सादर

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  5. वाह बेहतरीन प्रस्तुति

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  6. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
      प्रणाम
      सादर

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  7. हमारी प्रकृति ने हमें अमूल्य संपदाएं दी है
    और गिलोय उनमें से एक है

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  8. मूल्यवान जानकारी युक्त बहुत सुंदर और सार्थक अभिव्यक्ति।

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  9. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 23/06/2019 की बुलेटिन, " अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की ११८ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. सहृदय आभार आदरणीय ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने हेतु
      प्रणाम
      सादर

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  10. प्रिय अनीता - - तुम्हारी विशिष्ट प्रतिभा को दिखाती ये रचना सचमुच अपने आप में विशिष्ट है |आयुर्वेद में अमरबेल के नाम से विख्यात ये अमरलता अपने आप में अद्भुत विशेषताओं को समेटे है | सागरमंथन के समय मिले अमृतकलश के लिए देव - दानवों के बीच हुई छीना- झपटी में [इस कलश से ] छलकी अमृत बूंदों से यह अद्भुत औषधि अस्तित्व में आई , जो दिव्यगुणों से भरी थी और जिसे भारतवर्ष के आयुर्वेद पुरोधाओं ने अपने गहन शोध और अनुभव से त्रिदोषनाशक और सर्वगुणकारी के रूप में पहचाना | इसका उपयोग आज भी आयुर्वेदिक औषधियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है | बाबा रामदेव जी की बदौलत लगभग सभी लोग इसके गुण -धर्म से अच्छी तरह वाकिफ हैं | मुझे भी तुम्हारी रचना के बहाने से ये बात कहने का दुर्लभ अवसर मिला है, कि कई साल पहले मेरी सासु माँ को भयंकर टाईफ़ाइड हो गया था, जिसके चलते उन्हें रक्त विकार और हीमोग्लोबिन की कमी हो गयी | उसके लिए मैंने किसी की सलाह पर उन्हें सूखी पकाई गिलोय की बजाय , गिलोय की हरी डंडियाँ कूटकर उसके रस का सेवन करवाया था | ताजा डंडियों के इस रस से उनके रक्त में HB की वृद्धि से उन्हें अभूतपूर्व लाभ बहुत थोड़े से समय में मिला , जो कई दवाईयों से महीनों में भी संभव न हो पाया था | इस अमृता के दिव्य गुणों को अपनी रचना में सजाकर एक मौलिक विषयात्मक सृजन के लिए हार्दिक शुभकामनायें और बधाई | सस्नेह --

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    1. मुझे सच में अब तक पता नहीं था। नाम बहुत सुना था इस बेल का।

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    2. तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी जी और प्रिय मीना दी जी
      आप का स्नेह और सान्निध्य यूँ ही बना रहे
      प्रणाम
      सादर

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  11. कविता रूप में मिली उत्तम जानकारी
    प्रिय अनिता, हम आपके हैं आभारी !

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    1. दी जी आभारी तो मैं आप की हूँ आप ने मेरे शब्दों को इतना मान दिया आप का स्नेह यूँ ही बना रहे
      प्रणाम
      सादर

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  12. अनिता दी,बहुत ही उपयोगी जानकारी शेयर करने के लिए धन्यवाद।

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  13. बहुत ही सुंदर, ज्ञानवर्धक रचना सखी ,गिलोय के चमत्कार को हम भी अनुभव कर चुके हैं ,आर्यवेद ,जिसे हमने त्याग दिया था एक बार फिर उसे अपनाने का समय आ गया हैं।

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    1. सही कहा प्रिय कामिनी दी जी |तहे दिल से आभार आप का
      सादर स्नेह

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  14. गिलोय के चमत्कारिक गुणों से अच्छी तरह से परिचित हूँ कविता रूप में और भी उत्तम जानकारी मिली अनीता जी

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    1. तहे दिल से आभार भास्कर भाई आप का
      प्रणाम
      सादर

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  15. प्रकृति की अपनी व्यवस्थाएं हैं निरोग करने की.
    आपकी कविता उस प्रकृति को नमन करती है जैसे.

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    1. आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है प्रिय सखी
      सही कहा आप ने प्रतिपल प्रकृति को नमन करती मैं और मेरी रचना |आप का सान्निध्य यूँ ही बना रहे
      सादर स्नेह

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  16. कविता के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी देने के लिए आभार प्रिय सखी ।

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,