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शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

एहसास का समुंदर



एहसास के समुंदर में प्रेम की कश्ती, 
मझदार के उस पार पहुँचा दो तो कोई बात हो |

फ़ज़ाओं में पनप रही  नेह की महक,
आशियाना हमारा महका दो तो कोई बात हो |

 ख़ुशगवार  ज़िंदगी  मुठ्ठी में कुछ मायूसी के लम्हे, 
इन्हीं लम्हों को  प्रीत का  झूला झुला दो तो कोई बात हो |

गुज़र गये वो पल एक बार फिर लौटा  दो, 
उन्हीं  पलों में महक तुम्हारी महका दो तो कोई बात हो |

वक़्त के थपेड़ों से यूँ घबराया  न करो,  
इन्हीं थपेड़ों  में मशाल प्रीत की जला दो तो कोई बात हो |

एहसास के अनगिनत मोती धारण किये साँसों पर, 
इन्हें छूकर तुम  कोहिनूर बना  दो तो कोई बात हो |

- अनीता सैनी 

31 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!मख़मली एहसासात को शब्द रूपी मोतियों में पिरोकर अभिव्यक्ति को हृदयस्पर्शी बना दिया है.

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    1. तहे दिल से आभार आदरणीय |उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
      प्रणाम
      सादर

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  2. वाह! इन थपेड़ो में मशाल प्रीत की जला दो त कोई बात हो। बेहतरीन।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-07-2019) को "आशियाना चाहिए" (चर्चा अंक- 3404) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु
      प्रणाम
      सादर

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    २२ जुलाई २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  5. ख़ुशगवार ज़िंदगी मुठ्ठी में कुछ मायूसी के लम्हें
    इन्हीं लम्हों को प्रीत का झूला झुला दो तो कोई बात बेहतरीन रचना सखी

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  6. वाह कितने रेशमी जज़्बात पिरोते हैं ।
    बहुत सुंदर कोमल अहसास लिए उम्दा सृजन।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय कुसुम दी जी
      सादर स्नेह

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  7. एहसास के समुंदर में प्रेम की कश्ती,
    मझदार तक पहुँचा दो तो कोई बात हो |
    वाह!!!
    लाजवाब सृजन...

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय दी जी
      सादर स्नेह

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  8. एहसास के अनगिनत मोती इन्हे कोहिनूर बना दें तो कोई बात हो वाह अनीता जी सुन्दर एहसास

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  9. वाह!!खूबसूरत एहसास !!प्रिय सखी ।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय सखी |
      सादर स्नेह

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  10. बहुत खूबसूरत रचना, अनिता दी।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय ज्योति बहन
      सादर स्नेह

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  11. इन्हीं लम्हों को प्रीत का झूला झुला दो तो कोई बात....बेहतरीन

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  12. रूहानी मखमली एहसासो से भरी बहुत ही प्यारी रचना प्रिय अनीता। लेखन का र्य नया रंग बहुत मनमोहक हैं ।

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    1. तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी जी
      सादर स्नेह

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,