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बुधवार, 16 मई 2018

बैरी मन



दोहे... प्रथम प्रयास 

हुनर  तुम्हारा सादगी,नैना तीक्ष्ण कटार ।
देखा जबसे आपको,हुआ तभी से प्यार ।।

शब्द   प्यार  में  अल्प  है, गहरे  लेना भाव।
प्रेम मेरा स्वीकार हो, दिल पर करो न घाव 

नजरों   से    दूर   हो, भेजा    है  पैगाम
साजन  राह  निहारती, गोरी सुबह शाम

राह   निहारें  गोरङी,लेकर साजन नाम
कब  आओगें  पीवजी,हुई सुबह से शाम

बैरी   मन  लागे  नहीं,पिया  बसे  परदेश
जिवङो तरसे दिन रेन, नयनन जोए बाट

दर्पण देख गोरङी,फिर फिर कर सिंगार
रूठ  न  जावे पीवजी,सोचें यह हर  बार

पल पल राह निहारती,घङी घङी बैचैन।
साजन तेरी याद में,बरसे नित ही नैन।

- अनीता सैनी 

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