गुरुवार, 24 मई 2018

शिक्षा


अहम वहम हुंकारते ,
गुण शिक्षा अब रोय |
अधिकार धरा पर दोगले ,
फ़र्ज़  परगमन ढोय ||
- अनीता सैनी

3 टिप्‍पणियां:

रेणु ने कहा…

वाह प्रिय अनीता।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (15-01-2020) को   "मैं भारत हूँ"   (चर्चा अंक - 3581)    पर भी होगी। 
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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मकर संक्रान्ति की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

Jyoti khare ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन