रविवार, 27 मई 2018

शाख़




चमक तुम्हारी  चाँदनी ,
मन भी देखो पाक |
प्रेम हमारा दामिनी, 
है क़ुदरत की शाख़   |

-अनीता सैनी 

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर पनक्तियाँ प्रिय अनीता।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (07-01-2020) को   "साथी कभी साथ ना छूटे"   (चर्चा अंक-3573)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

    जवाब देंहटाएं