गुरुवार, 10 मई 2018

शिकस्त




मोहब्बत की राहों में शिकस्त खाए  बैठे हैं  वो 
ख़ामोश निगाहों से गुनाह क़बूल किये बैठे हैं  वो 
समय की चोट कहूँ  या वक़्त का मरहम 
सीने से लगाये बैठे हैं वो 
लव  ख़ामोश, आँखों से बयां कर बैठे हैं वो 
भूल चुके जीना, ज़िंदगी को सीने से लगाये बैठे हैं वो 

- अनीता सैनी 

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (06-01-2021) को "अभी बहुत कुछ सिखायेगी तुझे जिंदगी"     (चर्चा अंक-3938)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. लव ख़ामोश, आँखों से बयां कर बैठे हैं वो
    भूल चुके जीना, ज़िंदगी को सीने से लगाये बैठे हैं वो
    अपनी अलग पहचान छोड़ती प्रभावशाली रचना - - नमन सह।

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anitasaini.poetry@gmail.com