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शुक्रवार, जून 1

मोहब्बत



कुछ पल की मुहब्बत मिली 
कुछ पल  का  सुरूर 
जीवन तपती रेत बना 
धुआँ-सा उड़ता गुरुर |

- अनीता सैनी 

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहूत खूब प्रिय अनीता।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-02-2021) को "विश्व प्रणय सप्ताह"   (चर्चा अंक- 3970)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --
    "विश्व प्रणय सप्ताह" की   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  3. गागर में सागर...बहुत सुंदर अनीता जी 🌹🙏🌹

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  4. चंद शब्दों में गहरी बात,बहुत खूब, प्रिय अनीता

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  5. दीदी।बहुत खूब लिखा आपने

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  6. मुख़्तसर लफ़्ज़ों में ज़िन्दगी का अर्क उभर आया है - - मर्म स्पर्शी पंक्तियाँ।

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