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गुरुवार, जुलाई 26

एक पन्ना डायरी का

मुहब्बत  का फ़रमान, अपनेपन का एहसास
 समा लेता  दर्द-ए-गम , जताता न कोई अहसान ।।

प्यार  का  अफ़साना, दर्दभरी  कहानी
सहेज  लेता  दिल  में, उसी  की  ज़ुबानी ।।

झूठ  को  बढ़ाता  न  सच   को  छिपाता,
 दिल  बहुत साफ़, जताकर देखो हर बात।

छूट जाते  हर रिश्ते , दफ़्न  हो  जाते  अरमान
डायरी का वह पन्ना,  दोहराता  वही  पहचान ।

- अनीता सैनी 










4 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार(29 -6-21) को "मन की बात नहीं कर पाया"(चर्चा अंक- 4110 ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    --
    कामिनी सिन्हा

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  2. डायरी जब भी टंटोलोगे सब कुछ बयाँ कर देगी.
    बहुत सुंदर अहसास समेटे हुए.
    ये पन्ना बहुत कुछ बोलता है.

    नई पोस्ट पुलिस के सिपाही से by पाश

    जवाब देंहटाएं
  3. डायरी का पन्ना जीवन की हर उथल पुथल का सच्चा दर्पण होता है ।
    बहुत सटीक सुंदर अभिव्यक्ति प्रिय अनिता आपकी।
    सस्नेह।

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