समर्थक/Followers

बुधवार, 8 अगस्त 2018

निष्ठुर बाप ....

निष्ठुर बाप
माँ  करूणा  का  सागर
ठहर गयी  मैं शब्दों पर
कैसे करु उजागर |


कलेजा तड़पता तो  होगा,
संवेदना  भी  रही  होगी ,
आँख से निकले  होगे आँसू  ,
आँखें  ख़राब हैं बहाना भी बनाया होगा ,
एसे बाप को निष्ठुर किसने बनाया होगा |


सूकून से सोया न  कभी,
मिलीं न सुख की छाँव,
दौड़ता  रहा इधर-उधर,
संजोता रहा  हर  गम,
जुबां सुन, आँखें खुली  रही  होंगीं  ,
देखने    पर     निष्ठुर,
परन्तु  मर  रहा  होगा , हर  दम  |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें