गुरुवार, 23 मई 2019

बुद्धि का छल बल


 विचारों के भंवर में उलझी अंतर्वेदना  
जद्दोजहद के बाद सुकून की छाँव तलाशने लगी  
धूसर रंगों में रंगा उम्मीद का रंग  
आकाश में मंडराते काले बादलों संग 
ना-उम्मीदी में ढलने  लगा 
आँखों में तैरता निराशा का सन्नाटा 
तारों की छाँव में बार-बार मिलने आने लगा 
अनायास ही क़दम डग भरने लगे 
धूप और अंधेरे की गहराइयों को नापते 
ख़ुशियों  से कोसों  दूर जाने लगे 
कुछ बुद्धिजीवियों ने बुद्धि के छल-बल 
से फाँस लिया चंद्र-भानु  को 
वो भी अब आग बरसाने लगा  
सोख धरा का नीर 
मेहनत का  उपहास उड़ाने  में मशग़ूल  हो गया 
बुद्धि की जीत मेहनत अब पाँव से रौंदे जाने लगी 
आगबबूला हुआ मन 
तन से बहते पसीने को फिर 
न बहने की  दुहाई देने  लगे 
ज़िंदगी  को जीने की ललक 
आँखों के बहते पानी में कुछ शब्द 
अनायास ही  बहने लगे |

दोहे
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भाव समर्पण से सजे, मुखड़े पर मुस्कान ।

चौखट पर जब जुल्म हो, न्याय करे हलकान ।।



मोहक फूल खिला-खिला, बुना शूल का जाल ।
रसना पर मृदु शब्द हो, सरगम में  हो ताल।। 

हाव-भाव का ताना बुने, आभूषण को धार।
मैंं के मद में डूबकर, मत रख  मन पर भार ।।

मानव मन को तौलती, धरा स्वर्ण की खान।
हरा-भरा आँचल करो, लहर-लहर हो धान।।

संस्कार मेंं सज रहा, अब तो खरपतवार। 
बढ़ता है विश्वास में, आज धरा पर प्यार। 

जग जननी धरती बनी, जीवन का आधार। 
घर में आग लगी हुई, बढ़ता हाहाकार ।।

जब प्रहार सूरज करे, जले द्वेष का राज ।
प्यारी मोहक महक से सजे नेह के साज।

- अनीता सैनी 


16 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत ही लाजवाब रचना

Sheru Solanki ने कहा…

वाहहहहहहहहह
वाह कहने है अति सुन्दर रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (24-05-2019) को "आम होती बदजुबानी मुल्क में" (चर्चा अंक- 3345) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मन की वीणा ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर अनुपम अभिव्यक्ति।
काव्य सौष्ठव से भरपूर अप्रतिम अद्भुत।

अमित निश्छल ने कहा…

अद्भुत। निस्संदेह लाज़वाब रचना मैम।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

गहन विवेचना प्रस्तुत करती अभिव्यक्ति।

विश्वमोहन ने कहा…

बहुत सुंदर दोहों से सजी रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया आप का

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी आप का बहुत बहुत शुक्रिया
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय आप
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह अद्भुत रचना सखी 👌👌🌹

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी अनुराधा जी तहे दिल से आभार आप का
सस्नेह
सादर