गुरुवार, 30 मई 2019

जब मानव बना प्रदूषण का शिकार



                

   मैं  धरा, माँ  सृष्टि   ने  मृदुल  कल्पना  पर, 
  धर  सुन्दर  सुमन  स्नेह  भाव  से   किया  शृंगार, 
अमूल्य  धरोहर  से  सजा आँगन, 
 छटा  निराली  प्रभात  की, 
निशा आच्छादित  नील  गगन, 
 हृदय  में   हरितमय  लाली, 
प्रीत  पथ  की  नाज़ुक  डोर  पर, 
 अंतरमन  से  अर्पित  माँ  का  निर्मल दुलार |

करुणा  शिखर  पर  उपजी, 
वात्सल्य  की  करुण  पुकार, 
 गढ़े  पदचाप  मनु  के, 
खिली अधरों पर   मधुर  मुस्कान, 
शीतल  नीर , पवन के झौंके, 
दिया  सृष्टि  ने  मानव  को, 
 अन्नपूर्णा  का पूर्ण  भंडार |

 अति स्नेह  ने   किया  जर्जर,  
 प्रकृति  का   दिया  उपहार, 
कृत्रिमता   से  गहन  प्रेम, 
 प्रकृति  का  बरबस   उपहास, 
 भौतिकता के मोह  में  बना निठल्ला मानव, 
 प्रदूषण   का   हुआ  शिकार |

कृत्रिमता  की ललक , मशीनीकरण ,
से  बढ़ा उद्योगों  का  विस्तार,
 प्रदूषित  वायु  का   अंबार ,
ग्लेशियर  का  प्रबल  प्रवाह, 
सागर में  पल-पल  क्षीण धरा की काया, 
रचा   प्रलय   का   तांडव |

 साँसों   पर  दूषित  वायु  का  आधिपत्य, 
 उपजे  तन-मन  में  अनचाहे  कीट ,
 हुईं   ध्वनियाँ   स्थूल, 
 पल-पल  बहे   पानी  पश्चाताप  का, 
  छलका  नयनों  से नीर, 
 अब  हृदय  में  सुलगी, 
  प्रकृति  के  स्नेह  की  पावस  पीर |

    - अनीता सैनी

34 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (31-05-2019) को "डायरी का दर्पण" (चर्चा अंक- 3352) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मुकेश सैनी ने कहा…

Wah kya bhub anita ji

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सार्थक रचना

deepshikhaaj ने कहा…

अति सुंदर सखी ।

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी,सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी

अमित निश्छल ने कहा…

वाह। मृदुल सृजन। भावों की शीतल आधारशिला।

Kamini Sinha ने कहा…

कृत्रिमता की ललक , मशीनीकरण
से बढ़ा उद्योगों का विस्तार, प्रदूषित वायु
ग्लेशियर का प्रबल प्रवाह
सागर में पल -पल क्षीण धरा की काया
रचा प्रलय का तांडव

बेहतरीन सृजन ,सखी

~Sudha Singh vyaghr~ ने कहा…

अनीता जी आपने तो प्रदूषण को भी साहित्यिक रस से सराबोर कर दिया. बेहतरीन रचना 👌 👌

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

प्रदूषण पर सार्थक चिंतन की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करती अभिव्यक्ति।

Meena Bhardwaj ने कहा…

सुन्दर एवं सार्थक सृजन प्रिय अनीता !

Jyoti Dehliwal ने कहा…

अनिता दी,प्रदूषण की भयावहता को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया हैं आपने।

M VERMA ने कहा…

यथार्थ को आवाज दी आपने
सुंदर

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

प्रदूषण पर सार्थक रचना

मन की वीणा ने कहा…

सार्थक¡¡¡ समय का भयावह चित्र।
अप्रतिम लेखन।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी दीपा जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

स्नेह आभार प्रिय दी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी अनुराधा जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी कामिनी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी सुधा जी तहे दिल से आभार
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी मीना जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय बहन ज्योति जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय रितु दी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय कुसुम दी जी आप का स्नेह यूँ ही बना रहे
सादर स्नेह

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
३ जून २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय श्वेता बहन पाँच लिंकों में मेरी को स्थान देने हेतु
सादर

संजय भास्‍कर ने कहा…

ध्यान आकृष्ट करती रचना

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय भास्कर भाई
सादर