मंगलवार, 25 जून 2019

पश्चिमी पथ का कर परित्याग



हे ! मानव 
 पश्चिमी  पथ   का
  कर  परित्याग,
दिखावा  प्रगति  का 
वह  प्रलय  की  पुकार !

 हनन  मानवीय मूल्यों  का 
हारती इंसानियत,
हर तरफ़ हाहाकार
 उजड़ता हसरतों का बाज़ार |

तृष्णा के तेज़ से  बढ़े 
तन  की  तपिश 
देख तड़पता  अंतरमन !
घनघोर भँवर  में  उलझा  मानव 
 सुने  त्राहि-त्राहि  की  पुकार !

वर्तमान का  विनाशी चेहरा 
प्रतिपल  भविष्य पर  प्रहार, 
देख  कोयल  के कोमल  कंठ  करें   
 करुण  क्रंदन  की  बौछार |

 - अनीता सैनी 

24 टिप्‍पणियां:

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

भौतिकता और प्राकृतिक असंतुलन आज सामाजिक मूल्यों का ह्रास कर रहे हैं.
सटीक चिंतन.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (26-06-2019) को "करो पश्चिमी पथ का त्याग" (चर्चा अंक- 3378) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Anuradha chauhan ने कहा…

तृष्णा के तेज़ से बढ़े
तन की तपिश
देख तड़पता अंतर्मन !
घनघोर भँवर में उलझता मानव
सुने त्राहि-त्राहि की पुकार ! सुंदर और सटीक रचना सखी

शुभा ने कहा…

वाह!प्रिय सखी ,बहुत खूब!!

रेणु ने कहा…

वर्तमान का विनाशी चेहरा
प्रतिपल भविष्य पर प्रहार,
देख कोयल के कोमल कंठ करें
करुण क्रंदन की बौछार |
सार्थक चितन भरी रचना प्रिय अनीता |अनुप्रास की छटा प्रभावी है | हार्दिक शुभकामनायें और बधाई |

आनन्द शेखावत ने कहा…

वर्तमान को साक्षात करती रचना,अति सुन्दर।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
प्रणाम
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर ,यथार्थ रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
आप का ब्लॉग पर स्वागत है
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय कामिनी दी जी
सादर

उर्मिला सिंह ने कहा…

यथार्थ को इंगित करती उत्कृष्ट रचना

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी जी
प्रणाम

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

वाह बहुत खूब

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी जी
शुप्रभात
सादर

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत सुंदर

मन की वीणा ने कहा…

आधुनिकता और स्वतंत्रता पाने की अंधी दौड़ में मानव का कितना पतन कम शब्दों में बहुत सटीक संदेश देती रचना

मन की वीणा ने कहा…

आधुनिकता और पाश्चात्य सभ्यता की अंधी दौड़ में मानव का कितना पतन। कम शब्दों में बहुत सटीक संदेश देती रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी जी
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया दी जी
प्रणाम