मंगलवार, 22 सितंबर 2020

प्रीत खो गई कहीं

चंचल प्रीत मन के कोने से निकल 
शब्दों के कोरे  कोर पर  जा बैठी 
मृदुल वेग वादा समर्पण सब सो गए कहीं 
अनुत्तरित प्रश्न कहता! प्रीत खो गई कहीं।

चीख़ता-चिल्लाता पुकारता मानव 
देखो! अंतस के किवाड़ नहीं खोलता 
स्वयं में छिपा अनुराग दम तोड़ता आज 
निर्दयी कहता!  प्रीत खो गई कहीं।

करुणा की बहन है इसलिए सो गई 
चित्त के गोदाम में जगह नहीं बिक गई 
जीवन की आपा-धापी से थक गई कहीं 
अहंकार हत्यारा कहता! प्रीत खो गई कहीं।

समय से पिछड़ी तब महत्त्वाकाँक्षा ने दाग़ी 
भावों का अभाव विवेक ने न लाज रखी 
ज़िंदगी के ज्वर से जूझती ज़िंदा है कहीं 
संयम सहारा कहता!  प्रीत खो गई कहीं।

@अनीता सैनी 'दीप्ति'

32 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया अनुज मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24.9.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

      हटाएं
  4. अति सुंदर रचा है ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका उत्साहवर्धन हेतु।
      सादर

      हटाएं
  5. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना..🙏

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक आभार आदरणीय दी मनोबल बढ़ाने हेतु ।
      सादर

      हटाएं
  6. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ सितंबर २०२० के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया श्वेता जी पाँच लिंकों पर स्थान देने हेतु ।

      हटाएं
  7. उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

      हटाएं
  8. समय से पिछड़ी तब महत्त्वाकाँक्षा ने दाग़ी
    भावों का अभाव विवेक ने न लाज रखी
    ज़िंदगी के ज्वर से जूझती ज़िंदा ,,,।बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना, आदरणीया शुभकामनाएँ ।


    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  9. उत्तर
    1. तहे दिल से आभार आदरणीय दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  10. उत्तर
    1. हार्दिक आभार सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  11. ज़िंदगी के ज्वर से जूझती ज़िंदा है कहीं
    संयम सहारा कहता! प्रीत खो गई कहीं।
    अत्यंत सुन्दर और भावपूर्ण... अनुपम सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहे दिल से आभार आदरणीय मीना दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  12. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं
  13. मृदुल वेग वादा समर्पण सब सो गए कहीं
    अनुत्तरित प्रश्न कहता! प्रीत खो गई कहीं।
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर सटीक एवं लाजवाब सृजन।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक आभार आदरणीय सुधा दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।

      हटाएं
  14. उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाने हेतु।

      हटाएं
  15. उत्तर
    1. सादर आभार अनुज ब्लॉग पर स्वागत है आप का ..

      हटाएं
  16. मृदुल वेग वादा समर्पण सब सो गए कहीं
    अनुत्तरित प्रश्न कहता! प्रीत खो गई कहीं।
    जीवन की आपाधापी के बीच इंसान की मृदुल भावनाओं का क्षय होने की प्रक्रिया प्रबुद्ध कविजनों से कभी छुप नहीं पाती | सुंदर, सार्थक लेखन | सस्नेह

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु।
      सादर

      हटाएं

anitasaini.poetry@gmail.com