गुरुवार, जुलाई 26

मेरी ज़िंदगी मेरी बहन

     

रब  से माँगू यही  दुआ,मिले ख़ुशियों का जहां  ,
न  हो  आँख में  आँसू, हो न कभी मेरे दिल से ज़ुदा।

फूल-सी  कोमल  पारस-सी  पाक,
यह   वजूद   रहा   उसकी   साख।

तारों  की  झिलमिलाती  रोशनी,
   चाँद-सी  चमक  रही   वह ,
धड़कन   सीने  में  दिल, धड़कन   रही  वह ।

मेरी  चाहत  मेरा  मक़ाम  रही   वह ,
झाँकती  हूँ  आईने   में  परछाई   रही   वह  ।

मासूम   चेहरा ,  नादानी   का   पहरा,
दिल  बहुत  साफ़ , ज़ख़्म    बहुत   गहरा।

मुहब्बत   बहुत  है  किनारा  करना  पड़ा ,
डगर   कठिन  है    जीना   सिखाना   पड़ा ।
                                     - अनीता सैनी

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