गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
शुक्रवार, मार्च 6
खार
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कविता- खार ✍️ अनीता सैनी ….. मरुस्थल ने एक ही बात दोहराई कि सूरज ने नहीं, एक महीन सुराख़ ने समंदर को सोख लिया। वह सुराख़ पुरान...
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शुक्रवार, फ़रवरी 20
कालिख का वृत्त
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कालिख का वृत्त ✍️ अनीता सैनी ….. उन दिनों दसों दिशाओं में सूखा ही सूखा पसरा पड़ा था जैसे समय ने अपनी नमी सोख ली हो। ...
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मंगलवार, फ़रवरी 10
जीवन का हस्ताक्षर
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जीवन का हस्ताक्षर ✍️ अनीता सैनी …. बहुत सुंदर संयोग है, या कहूँ अर्थ से भरी हुई नियति। पीछे पलट कर न देखने की चाह के बावजूद समय ...
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मंगलवार, जनवरी 27
ख़ाली किनारे
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ख़ाली किनारे ✍️ अनीता सैनी …….. यहाँ इस समाज नाम की चारदीवारी में किसी न किसी को कुछ न कुछ बचाने का ज़िम्मा चुपचाप सौंप दिया जात...
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बुधवार, जनवरी 21
मौन का पड़ाव
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मौन का पड़ाव / अनीता सैनी ……. उसकी शिथिल पड़ती जुबान… पर तुम उस एकांत को छू नहीं सकते जहाँ देह नहीं, भाव आख़िरी साँस भरते हैं।...
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रविवार, जनवरी 4
उस ओर
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उस ओर ✍️ अनीता सैनी …… अगर तुम ले जा सकते हो, तो ले चलो उस शोर के पार जहाँ दुनिया अपने जूतों की आवाज़ दरवाज़े पर उतार देती है...
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गुरुवार, जनवरी 1
आत्मा का दर्द
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आत्मा का दर्द / ✍️ अनीता सैनी ….. मैं दिन और रात दोनों करवटों का साक्षी हूँ। नींद मेरे भीतर रास्ता खोजती है, पर दर्द हर दरवाज़े...
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सोमवार, दिसंबर 29
ओसरी में खड़ा गवाह
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ओसरी में खड़ा गवाह अनीता सैनी ……. उसे दिखाई देता है मोह का एक विशाल वृक्ष, जिसकी जड़ों में सदियों की आदतें पानी की तरह लगातार रि...
मंगलवार, दिसंबर 9
प्रतीक्षा एक तीर्थ
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प्रतीक्षा एक तीर्थ ✍️ अनीता सैनी …… कोई भी साया बस यूँ ही देवद्वार तक नहीं जाता भटकन उसे भी खारी लगने लगती है। मन की मरुस्थली द...
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