शुक्रवार, अगस्त 24

वफ़ा-ए -ज़िंदगी



ज़िंदा  रहना हर हाल में ,
ख़ामोशी  पर सवाल क्यों?
तड़प   रहा   दिल,
उनकी  यादों  पर  बवाल  क्यों?

वफ़ा-ए-ज़िंदगी   का  क़हर,
उल्फ़त  बटोरने   में  मगरुर,
टूटी  खिड़की  में  झाँक   रही,
ज़िंदगी    हर   पहर ।

बिखर    गये   कुछ  ख़्वाब  
कुछ वक़्त से पहले निखर गये 
कुछ  समा   गयें   दिल  में ,
कुछ   राह   में   बिखर   गये। 

हर   क़दम   पर   ग़म  पीती  रही,
अदा   करती  रही    महर,
ज़िंदा  रहने    के   लिये,
  पीना  पड़ता   ज़हर,
मौत  एक घूँट में हो जाती मगरूर।

मंगलवार, अगस्त 21

मैं


मैं  का नाता
मनुज से गहरा
छूट रहा जग
मैं  में  ठहरा ।

मैं का दरिया
मैं का पहरा
ढूब रहा जग
 मैं का अँधेरा।

छिपा रहे हैं
अपना  चेहरा
दिखा रहे 
 प्रभाव  हैं  गहरा।

मैं  की  रस्सी
मैं  का जाल
मानवता का
हुआ यह हाल।

#अनीता सैनी 

गुरुवार, अगस्त 16

वेदना

                       
समय के साथ बह गयी  ज़िंदगी,                           
ख़ामोश निगाहें ताकती रह गयीं ,                          
किये न उनके क़दमों में सज्दे,                          
हर बार इंतज़ार में रह गयी  |                            

सज्दे  न करेगे  उन की यादों के,                         
अल्फ़ाज़  से यही दुआ करते मिले,                          
टूटे दिल की दरारों में झाँकता,                             
उनकी यादों का कारवाँ  मिला |                          

गुनाहों की सज़ा  हर बार मिले ,                        
हर गुनाह की सजा सौ बार मिले,                      
बिछाये राहों में फूल,                           
काँटों की सौग़ात मिले |                         

इस तल्ख़ ज़माने की ठोकर मिली,                         
हर ठोकर पर मायूसी खिली,                          
सजाते रहे काँटों का ताज,                             
इल्म ये रहा,                           
मुस्कुराते रहे लव,                              
दिल तड़पते मिले |                              

# अनीता सैनी                                 

रविवार, अगस्त 12

शिक्षा

प्यार   न   पैसा,
चंद  शब्दों  का  दान
बने  भारत  महान ।

शिक्षा  वह  ज्ञान
आसां  हों  राहें
जीवन  हो  महान।

अनोखा   गहना  शिक्षा,
करे इससे   जो   प्यार
शब्द    मृदुल , 
मन   में  आता  निखार ।

सुन्दर  गहना  शिक्षा,
करे हर बच्चे का श्रृंगार,
व्यवहार  संवरता,
 चमकता  जीवन ,
पनपता   स्वाभिमान।

 -अनीता सैनी 
हिम्मत 

लड़खड़ाएँगें  क़दम, 
क़दमों पर एतवार  मत   करना,
बहुत मिलेंगे  मंज़िल की राह बताने वाले,
 किसी का इंतज़ार मत  करना,
आँख का पानी शिकस्त बता देगा,
 इसे   सीने  में  दफ़्न  कर   देना,
मुस्कुराते रहना  ता-उम्र,
मायूसी  को   पास मत  भटकने  देना,
मिल जाएगा मंज़िल का पता,
शिकस्त को सीने  में पनाह देना |

- अनीता सैनी 

हाइकु रचनाएँ




1. आँचल   माँ   का 
     सुकून  का   सैलाब
      बच्चों  का  लिहाफ़ ।


2.    दुःख   में   हँसे
       राहें  करें    आसान
         हाथ  थामे   माँ।


3.   दर्द     में    चूर
       जीवन    में  सूरुर
        आँखों    में    नूर ।



4.  आँखों   में   नमीं
      जीवन   में  सहमी
       बनीं  तू  कहानी ।

 
 5. शिक्षा का हक़
   बच्चों  का अधिकार
    अवश्य  सौंपें  |

6. हक़  से  माँगो
अपना  अधिकार
सजग रहो   |

7 . जनमत  का
मतदान  है   हक़
बनो  सशक्त |

  - अनीता सैनी
   
   
   
       

गुरुवार, अगस्त 2

हाइकु रचना


प्यार  से  पाला 
गिरवी  रख  दिया 
तंग   पेट   ने ।

........


भूख  ने  मोड़ा 
ज़रुरत  ने  तोड़ा 
  न  नूर   छोड़ा  ।
....

मन  बहका
तन  ठोकर  खायें
मैं   सुख  ढूँढूँ |
......

वक़्त ने तोड़ा
हिम्मत ने जोड़ा 
कर्म  संग  दौड़ा ।
......

आँखों  में  नमीं 
आँचल  में   छीपायें 
हँसती   जाये ।

....

बुधवार, अगस्त 1

अमर प्रेम

  
दोहे 
                                        
विश्वास  ज्योति  प्यार  की,उजियारा  चहुँ ओर |
दामन थामा  जी  मन ने ,मिली  प्रीत   की  डोर ||

प्रेम  प्रीत  में बावरी,लिखे  मीरा  ने  पद |
अमर प्रेम मीरा अरु,मीरा  प्रीत  में  मद ||

चाहत  मेरी  एक तुम,एक तुम्हीं  अरमान |
रग-रग में तुम हो बसे,है  तुम पर अभिमान ||


बात सुनो प्रिय राधिका, मुझको अपना जान |
जब से देखा नैन भर, अर्पित तब से प्राण ||

हारी दिल अपना सखी,कान्हा तो चितचोर
एक उसी का नाम जप, होती है नव भोर ।।

- अनीता सैनी