सोमवार, अक्तूबर 29

व्याकुल मन कि पुकार

                                                

कण-कण  में   गूँज  रही,
व्याकुल  मन  की   पुकार |

हर   पत्थर   सुना   रहा,  

प्रेम   भक्ति   का    सार |

अविरल   बहती   भक्ति,

जग   का   करे   उद्धार |

उर   से    उलझी    पीड़ा, 

सुलझी   कान्हा   के  द्वार |

प्रीत  पथ  पर   झूमे  जीवन, 

छिटका   द्वेष   का   द्वार |

सुख   वैभव  परित्याग  किया,

मिला   प्रेम   भक्ति   का   द्वार |

वक़्त    में    सिमटी   गाथा,
तड़पती    हृदय    के   पार  |

       -अनीता सैनी 

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