मंगलवार, अक्तूबर 9

आख़िर क्यों ?



                                               
                                                        
विचारों का प्रलय  हृदय  को क्षुब्ध,
 मार्मिक  समय मन को स्तब्धता के,
  घनघोर  भंवर  में  डुबो बैठा,
गुरुर के  हिलोरे  मार  रहा मन,
स्वाभिमान दौड़ रहा  रग-रग में,
 झलकी  न आँखों  से  लाचारी,
 न   ज़िदगी   ने  भरा  दम,
 न लड़खड़ाये   क़दम।

अकेलेपन के माँझे में उलझी
 ज़िंदगी   से   करती  तक़रार
नहीं  वह  लाचार, 
समाज  के  साथ  चलने   का,
हुनर  तरासती  शमशीर  रही वह |

देश   ऋणी   उसका,
हर रिश्ते  की क़द्रदान   रही  वह,
उठते   मंज़र  को  साँसों   में  पिरोया,
हर बला  को  सीने   से  लगाया,
न त्याग  में   कटौती,
न  माँगी  ख़ुशियों  की  हिस्सेदारी,
फिर  क्यों  कहता  समाज,
शहीद  की  पत्नी   को ,
बेवा   और   बेचारी ?
सराबोर क्यों न  करें,
उस ख़िताब से,
जिसकी  वह  हक़दार ?

    -अनीता सैनी




10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना 30 मई 2022 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

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  2. शहीद की बेवा सिर्फ़ शहीद के नाम से ही क्यों पहचानी जाए? क्रांतिकारी दुर्गारानी वोहरा ने अपने पति के शहीद हो जाने के बाद भी अपनी क्रांतिकारी गतिविधियाँ जारी रखीं और एक क्रांतिकारी, एक समाजसेविका और एक अध्यापिका के रूप में, अपनी एक अलग पहचान बनाई.

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  3. देश ऋणी उसका,
    हर रिश्ते की क़द्रदान रही वह,
    उठते मंज़र को साँसों में पिरोया,
    हर बला को सीने से लगाया,
    न त्याग में कटौती,
    न माँगी ख़ुशियों की हिस्सेदारी,
    फिर क्यों कहता समाज,
    शहीद की पत्नी को ,
    बेवा और बेचारी ?
    सराबोर क्यों न करें,
    उस ख़िताब से,
    जिसकी वह हक़दार ?
    सही कहा देश जिसका ऋणी है समाज उसे बेचारा बनाकर उसका जीना और दुस्वार कर देता है।

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  4. बहुत मार्मिक

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  5. क्योंकि वीर पुरूष की पत्नी को किसी पुरस्कार में मिले तमगे की तरह मान लिया जाता है, समाज स्त्री को उसके स्वतंत्र अस्तित्व के साथ ससम्मान स्वीकार नहीं कर पाता शायद।
    बेहद गहन भाव लिए मर्म को स्पर्श करती विचारणीय अभिव्यक्ति।

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  6. हृदयस्पर्शी रचना। अपने बलबूते जिंदगी जीती है, बेचारी क्यों ?

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  7. बेनामी31/5/22, 1:31 pm

    सच कहा - इतना बड़ा त्याग करने वाली स्त्री बेबस और लाचार क्यों कहलाती है ? हृदयस्पर्शी रचना

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  8. मर्म को भेदती हुई..... सशक्त शब्द।

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