शुक्रवार, नवंबर 13

सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए


थक-हारकर
 जब सो जाती है पवन 
दीपक की हल्की-सी लौ में 
मिलने आतीं हैं 
बीते लम्हों की 
कुछ हर्षित परछाइयाँ 
चहल-पहल से दूर 
ख़ामोशी ओढ़े एक कोने में 
कुछ सुनतीं हैंं  
कुछ सुनातीं हैं 
स्वप्न सजाए थाल में 
 बीते पलों के कुछ मुक्तक 
लिए आतीं हैं गूँथने
  हरी दूब-सा खूबसूरत हार 
चाँदनी रात में
 बरसती धुँध छानती हैं 
कुछ भूली-बिसरी स्मृतियाँ 
तुषार बूँदों में भीगे 
मिलने आ ही जाते हैं 
कुछ अविस्मरणीय दृश्य 
हाथों पर धरे अपने 
 अनमोल उपहार 
सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए।

@अनीता सैनी 'दीप्ति'

32 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 13
    नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय यशोदा दी सांध्य दैनिक पर स्थान देने हेतु।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया अनुज मनोबल बढ़ाने हेतु।

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  3. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण।
    रूप-चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  4. तुषार बूँदों में भीगे
    मिलने आ जाते हैं
    कुछ अविस्मरणीय दृश्य
    हाथों पर धरे
    अपने अनमोल उपहार
    सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए।
    वाह !!!
    अत्यंत सुन्दर मखमली अहसास भरा सृजन । तस्वीर ने सृजन को और भी सुन्दर और प्रभावपूर्ण बना दिया है ।

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    1. सादर आभार आदरणीय मीना दी आपकी प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली।मनोबल बढ़ाने हेतु दिल से आभार।
      सादर

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    1. हार्दिक आभार सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  6. बहुत भावपूर्ण सरस रचना |

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  7. उत्तर
    1. हार्दिक आभार आदरणीय दी मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  8. बरसती धुँध छानती हैं कुछ भूली बिसरी स्मृतियाँ...।भावपूर्ण पंक्तियाँ..।दीपोत्सव की मंगलकामना..।

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    1. दिल से आभार आदरणीय दी आभारी हूँ मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  9. अत्यंत सुन्दर रचना

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  10. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-11-2020) को   "गोवर्धन पूजा करो"   (चर्चा अंक- 3886 )     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    दीपावली से जुड़े पञ्च पर्वों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    1. सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

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  11. कुछ अविस्मरणीय दृश्य
    हाथों पर धरे
    अपने अनमोल उपहार
    सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए। अनुपम रचना सजल अनुभूतियों से भरी। दीपोत्सव की असंख्य शुभकामनाएं ।

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    1. आभारी हूँ सर मनोबल बढ़ाने हेतु। आपकी प्रतिक्रिया संबल है मेरा आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  12. वाह
    बेहद खूबसूरत रचना
    आपको भी सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं🌹🍁

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    1. आभारी हूँ सर मनोबल बढ़ाने हेतु।आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  13. दिल को छूती सुंदर रचना।

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    1. आभारी हूँ ज्योति बहन मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  14. तुषार बूँदों में भीगे
    मिलने आ जाते हैं
    कुछ अविस्मरणीय दृश्य
    हाथों पर धरे
    अपने अनमोल उपहार
    सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए
    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण मधुर स्मृतियां
    वाह!!!
    लाजवाब।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय दी मनोबल बढ़ाने हेतु।
      सादर

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  15. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (११-०७-२०२१) को
    "कुछ छंद ...चंद कविताएँ..."(चर्चा अंक- ४१२२)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  16. बहुत ही सुंदर सृजन.....

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  17. रेशमी अहसास की गूंथित सुंदर भाव रचना! जैसे बादलों के अवगुंठन से चाँद हौले हौले झांक कर मोहित करता हो ।
    अभिनव, सुंदर, मोहक।

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  18. अति सुंदर भावपूर्ण रचना

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