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शनिवार, मार्च 30

समय धार पर चलता जीवन



   
                                                                                                                             
मोह  माया  में फंसा  जीवन, 
इस    की    यही   कहानी, 
सिसक   रहा    हृदय, 
नहीं    मिटती     बेईमानी |

सृजन  बीच  छिपी  पीड़ा, 
होठों   से   कैसे  मुस्काऊँ,  
रुंधे    कंठ   बुझे   मन के, 
कैसे    आवाज़     लगाऊँ |

झर  रहे  प्रीत  फूल  धरा  के,  
कैसी  हुई  बौछार  गगन से, 
मादकता में फिर उलझ गये,  
हार  गए  चंचल   चितवन  से |

तपन  मरु   के  सिसके  छाले, 
चितादीप-सा  जलता  जीवन, 
  हृदय   में   धधक   रही  ज्वाला, 
समय  धार  पर  चलता   जीवन |

छूट   रहीं    साँसें    तन की, 
क़ीमत जीवन की तब समझे, 
जब   तक  रहे  इस   दुनिया में, 
रहे   मोह   माया   में   उलझे |

- अनीता सैनी 

26 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. प्रणाम आदरणीय सुशील जोशी जी
      सहृदय आभार आप का
      सादर

      हटाएं
  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/03/2019 की बुलेटिन, " सांसद का चुनाव और जेड प्लस सुरक्षा - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सहृदय आभार आदरणीय शिवम् जी
      ब्लॉग बुलेटिन में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  3. बहुत सुन्दर सृजन अनीता जी ।

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    उत्तर
    1. प्रिय मीना जी तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  4. मोह माया में फंसा है जीवन
    इस की यही कहानी
    सिसकता रहा हृदय
    नही मिटती बेईमानी
    यथार्थ !
    बेहतरीन सृजन आदरणीया

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
      सादर

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  5. बहुत सुंदर और सार्थक सृजन। आपको बधाई।

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    उत्तर
    1. प्रणाम आदरणीय वीरेन्द्र जी
      तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (01-04-2019) को "वो फर्स्ट अप्रैल" (चर्चा अंक-3292) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    उत्तर
    1. प्रणाम आदरणीय
      सहृदय आभार आप का चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. उत्तर
    1. सस्नेह आभार आदरणीय मुकेश की आप ब्लॉग पर पधारे
      सादर

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  9. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
    सादर

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  10. छूट रही सांसे तन की
    क़ीमत जीवन की तब समझे
    जब तक रहे इस दुनिया में
    रहे मोह माया में उलझे |

    बहुत खूब जी।

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    1. सस्नेह आधार आदरणीय मुकेश जी 🙏🙏🌷🌷
      सादर

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