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शनिवार, 30 मार्च 2019

समय धार पर चलता जीवन



   
                                                                                                                                                         

मोह  माया  में फंसा  जीवन 
इस    की    यही   कहानी 
सिसक   रहा    हृदय 
नही    मिटती     बेईमानी 

सृजन - बीच  छुपी  पीड़ा 
होठों   से   कैसे  मुस्काऊँ  
रुंधे    कंठ   बुझे   मन के 
कैसे    आवाज़     लगाऊँ  

झर  रहे  प्रीत  फूल  धरा  के 
कैसी  हुई  बौछार  गगन से 
मादकता में फिर उलझ गए 
हार  गए  चंचल   चितवन  से 

तपन   मरु    सिसके  छाले 
चिता - दीप   सा  जलता  जीवन 
  हृदय   में   धधक   रही  ज्वाला 
समय  धार  पर  चलता   जीवन 

छूट   रही   सांसे   तन की 
क़ीमत जीवन की तब समझे 
जब   तक  रहे  इस   दुनिया में 
रहे   मोह   माया   में   उलझे |

- अनीता सैनी 

27 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. प्रणाम आदरणीय सुशील जोशी जी
      सहृदय आभार आप का
      सादर

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/03/2019 की बुलेटिन, " सांसद का चुनाव और जेड प्लस सुरक्षा - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    उत्तर
    1. सहृदय आभार आदरणीय शिवम् जी
      ब्लॉग बुलेटिन में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  3. बहुत सुन्दर सृजन अनीता जी ।

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    1. प्रिय मीना जी तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  4. मोह माया में फंसा है जीवन
    इस की यही कहानी
    सिसकता रहा हृदय
    नही मिटती बेईमानी
    यथार्थ !
    बेहतरीन सृजन आदरणीया

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    1. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
      सादर

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  5. बहुत सुंदर और सार्थक सृजन। आपको बधाई।

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    1. प्रणाम आदरणीय वीरेन्द्र जी
      तहे दिल से आभार आप का
      सादर

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (01-04-2019) को "वो फर्स्ट अप्रैल" (चर्चा अंक-3292) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. प्रणाम आदरणीय
      सहृदय आभार आप का चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए
      सादर

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. छूट रही सांसे तन की
    क़ीमत जीवन की तब समझे
    जब तक रहे इस दुनिया में
    रहे मोह माया में उलझे |
    .
    वाह, जीवन सार का दर्शन देती सराहनीय रचना

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    उत्तर
    1. सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
      सादर

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  9. उत्तर
    1. सस्नेह आभार आदरणीय मुकेश की आप ब्लॉग पर पधारे
      सादर

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  10. छूट रही सांसे तन की
    क़ीमत जीवन की तब समझे
    जब तक रहे इस दुनिया में
    रहे मोह माया में उलझे |

    बहुत खूब जी।

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    उत्तर
    1. सस्नेह आधार आदरणीय मुकेश जी 🙏🙏🌷🌷
      सादर

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,