समर्थक/Followers

शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

वफ़ा-ए -ज़िंदगी



ज़िंदा  रहना हर हाल में ,
ख़ामोशी  पर सवाल क्यों?
तड़प   रहा   दिल,
उनकी  यादों  पर  बवाल  क्यों?

वफ़ा-ए-ज़िंदगी   का  क़हर,
उल्फ़त  बटोरने   में  मगरुर,
टूटी  खिड़की  में  झाँक   रही,
ज़िंदगी    हर   पहर ।

बिखर    गये   कुछ  ख़्वाब  
कुछ वक़्त से पहले निखर गये 
कुछ  समा   गयें   दिल  में ,
कुछ   राह   में   बिखर   गये। 

हर   क़दम   पर   ग़म  पीती  रही,
अदा   करती  रही    महर,
ज़िंदा  रहने    के   लिये,
  पीना  पड़ता   ज़हर,
मौत  एक घूँट में हो जाती मगरूर।

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

मैं


मैं  का नाता
मनुज से गहरा
छूट रहा जग
मैं  में  ठहरा ।

मैं का दरिया
मैं का पहरा
ढूब रहा जग
 मैं का अँधेरा।

छिपा रहे हैं
अपना  चेहरा
दिखा रहे 
 प्रभाव  हैं  गहरा।

मैं  की  रस्सी
मैं  का जाल
मानवता का
हुआ यह हाल।

#अनीता सैनी 

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

वेदना

                       
समय के साथ बह गयी  ज़िंदगी,                           
ख़ामोश निगाहें ताकती रह गयीं ,                          
किये न उनके क़दमों में सज्दे,                          
हर बार इंतज़ार में रह गयी  |                            

सज्दे  न करेगे  उन की यादों के,                         
अल्फ़ाज़  से यही दुआ करते मिले,                          
टूटे दिल की दरारों में झाँकता,                             
उनकी यादों का कारवाँ  मिला |                          

गुनाहों की सज़ा  हर बार मिले ,                        
हर गुनाह की सजा सौ बार मिले,                      
बिछाये राहों में फूल,                           
काँटों की सौग़ात मिले |                         

इस तल्ख़ ज़माने की ठोकर मिली,                         
हर ठोकर पर मायूसी खिली,                          
सजाते रहे काँटों का ताज,                             
इल्म ये रहा,                           
मुस्कुराते रहे लव,                              
दिल तड़पते मिले |                              

# अनीता सैनी                                 

रविवार, 12 अगस्त 2018

शिक्षा

प्यार   न   पैसा,
चंद  शब्दों  का  दान
बने  भारत  महान ।

शिक्षा  वह  ज्ञान
आसां  हों  राहें
जीवन  हो  महान।

अनोखा   गहना  शिक्षा,
करे इससे   जो   प्यार
शब्द    मृदुल , 
मन   में  आता  निखार ।

सुन्दर  गहना  शिक्षा,
करे हर बच्चे का श्रृंगार,
व्यवहार  संवरता,
 चमकता  जीवन ,
पनपता   स्वाभिमान।

 -अनीता सैनी 
हिम्मत 

लड़खड़ाएँगें  क़दम, 
क़दमों पर एतवार  मत   करना,
बहुत मिलेंगे  मंज़िल की राह बताने वाले,
 किसी का इंतज़ार मत  करना,
आँख का पानी शिकस्त बता देगा,
 इसे   सीने  में  दफ़्न  कर   देना,
मुस्कुराते रहना  ता-उम्र,
मायूसी  को   पास मत  भटकने  देना,
मिल जाएगा मंज़िल का पता,
शिकस्त को सीने  में पनाह देना |

- अनीता सैनी 

हाइकु रचनाएँ




1. आँचल   माँ   का 
     सुकून  का   सैलाब
      बच्चों  का  लिहाफ़ ।


2.    दुःख   में   हँसे
       राहें  करें    आसान
         हाथ  थामे   माँ।


3.   दर्द     में    चूर
       जीवन    में  सूरुर
        आँखों    में    नूर ।



4.  आँखों   में   नमीं
      जीवन   में  सहमी
       बनीं  तू  कहानी ।

 
 5. शिक्षा का हक़
   बच्चों  का अधिकार
    अवश्य  सौंपें  |

6. हक़  से  माँगो
अपना  अधिकार
सजग रहो   |

7 . जनमत  का
मतदान  है   हक़
बनो  सशक्त |

  - अनीता सैनी
   
   
   
       

शनिवार, 11 अगस्त 2018

नारी...

महानता  पैर  पसारती,
हर पुरुष के द्वार,
नाम  लिखा जब नारी का,
बीलखति रही हर बार।


बदला  नज़रिया,
 दिलाशा   बड़ी  ,
पैरों  की  बेङियाँ,
आज  भी  वहीं ।

कल  बदला  न  आज,
विचार   में  खड़ी  ।
नारी   की  यह  दशा,
समाज   में    बढ़ी  ।

कहने   को  आजाद,
पिंजरे   में    खड़ी  है,
हाँथ   में   रही   चाबी,
ओर   सोच  में   पड़ी ।

डाँट से न फटकार से,
शिकार किया प्यार से,
बाँध  दिया  दहलीज़ पर,
 रिश्तों  की  दरकार   से।

बुधवार, 8 अगस्त 2018

निष्ठुर बाप ....

निष्ठुर बाप
माँ  करूणा  का  सागर
ठहर गयी  मैं शब्दों पर
कैसे करु उजागर |


कलेजा तड़पता तो  होगा,
संवेदना  भी  रही  होगी ,
आँख से निकले  होगे आँसू  ,
आँखें  ख़राब हैं बहाना भी बनाया होगा ,
एसे बाप को निष्ठुर किसने बनाया होगा |


सूकून से सोया न  कभी,
मिलीं न सुख की छाँव,
दौड़ता  रहा इधर-उधर,
संजोता रहा  हर  गम,
जुबां सुन, आँखें खुली  रही  होंगीं  ,
देखने    पर     निष्ठुर,
परन्तु  मर  रहा  होगा , हर  दम  |

शनिवार, 4 अगस्त 2018

"बंदी कल्याण एंव निःशुल्क कानूनी सहायता "

समाज के कमजोर वर्गों के लिए निःशुल्क कानून सहायता की व्यवस्था करना ।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करे। समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को सक्षम विधि सेवाएं प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पास किया । इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया।
इसका काम कानूनी सहयता कार्यक्रम लागू करना और उसका मूल्यांकन एवं निगरानी करना है। साथ ही, इस अधिनियम के अंतर्गत कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराना भी इसका काम है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है और गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए निःशुल्क कानून सहायता की व्यवस्था की गई है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करे।
समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को सक्षम विधि सेवाएं प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पास किया गया।
इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया। इसका काम कानूनी सहयता कार्यक्रम लागू करना और उसका मूल्यांकन एवं निगरानी करना है। साथ ही, इस अधिनियम के अंतर्गत कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराना भी इसका काम है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा)
.................................

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987  के अंतर्गत समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए और विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए किया गया।

नालसा नई दिल्ली में स्थित है। प्रत्येक राज्य में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की नीतियों और नालसा के निर्देशों को प्रभावी करने के लिए और लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएं देने और राज्यों  में लोक अदालतों का संचालन करने के लिए नालसा का गठन  किया गया है। राज्य के उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्षता की जाती है जो इसके मुख्य संरक्षक है।

कार्यप्रणाली
...................
प्रत्येक राज्य में एक राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण, प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति गठित की गई है। जिला कानूनी सहायता प्राधिकरण और तालुका कानूनी सेवा समितियां जिला और तालुका स्तर पर बनाई गई हैं। इनका काम नालसा की नीतियों और निर्देशों को कार्य रूप देना और लोगों को निशुल्क कानूनी सेवा प्रदान करना और लोक अदालतें चलाना है।

नालसा- 
राज्य प्राधिकरण
जिला प्राधिकरण
द्वारा दी जाने वाली नि:शुल्क कानूनी सेवाएं

नालसा देश भर में कानूनी सहायता कार्यक्रम और स्कीमें लागू करने के लिए राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण पर दिशानिर्देश जारी करता है।

मुख्य रूप से राज्य कानूनी सहायता प्राधिकरण,
जिला कानूनी सहायता प्राधिकरण,
तालुक कानूनी सहयता समितियों आदि को निम्नलिखित
कार्य नियमित आधार पर करते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई ह

मुफ्त कानूनी सेवाएं
..................

1.किसी कानूनी कार्यवाही में कोर्ट फीस और देय अन्य सभी   प्रभार अदा करना,
2.कानूनी कार्यवाही में वकील उपलब्ध कराना,
     कानूनी कार्यवाही में आदेशों आदि की प्रमाणित प्रतियां.    प्राप्त करना,
3.कानूनी कार्यवाही में अपील और दस्तावेज का अनुवाद और  छपाई सहित पेपर बुक तैयार करना।

मुफ्त कानूनी सहायता पाने के पात्र
.................

1.महिलाएं और बच्चे
2.अनुसूचित जाति
  3.अनुसूचित जनजाति के सदस्य
4. औद्योगिक श्रमिक 
  5. हिंसा, बाढ़, सूखे, भूकंप ।

लोक अदालत अदालत एक मंच है जहां अदालतों में विवादों/ लंबित मामलों या पूर्व मुकदमेबाजी की स्थिति से जुड़े मामलों समझौता या सौहार्दपूर्ण ढंग समाधान किया जाता है।

कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत लोक अदालत को वैधानिक दर्जा दिया गया है। इसके अंतर्गत यह है कि लोक अदालतों द्वारा किए गए निर्णय एक सिविल अदालत की डिक्री की तरह न होकर वैधानिक, अंतिम और सभी दलों पर बाध्यकारी है। इनके द्वारा की गई कार्यवाही न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी। किसी भी अदालत के समक्ष इसके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है।

लोक अदालत को भेजे जाने वाले मामलों की प्रकृति
................

लोक अदालत के क्षेत्र के न्यायालय में लम्बित प्रकरण, अथवाऐसे प्रकरण जो लोक अदालत के क्षेत्रीय न्यायालय में आते हों, लेकिन उनके लिए वाद संस्थित न किया गया हो।

परन्तु लोक अदालत को ऐसे किसी मामले या वाद पर अधिकारिता प्राप्त नहीं है जिसमें कोई समाधेय अपराध किया गया हो। ऐसे प्रकरण जो न्यायालय में लम्बित पड़े हों, पक्षकारों द्वारा न्यायालय की अनुज्ञा के बिना लोक अदालत में नहीं लाये जा सकते।

अदालत के समक्ष लंबित मामले
...............

1 .पार्टी लोक अदालत में विवाद को सुलझाने के लिए सहमत है।

2. दी गई पार्टी में से एक निपटान के लिए अदालत में आवेदन देती है।

3.यदि कोर्ट को यह संज्ञान हो जाता है कि मामला लोक अदालत में समाधान करने के लिए उपयुक्त है।


शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

तस्वीर देश की...

बदलते  देश  की  तस्वीर  देखिये ।
हो  रही  प्रगति  देश  की ,
हर  रोज  एक  नया  बबाल  देखिये ।

बेटियाँ  हाथ  का  खिलौना   बनी,
उन्नति की एक और मिसाल देखिये,
लाचारी का हथियार लिये घूम रहे,
यह भी एक आविष्कार देखिये ।

क़ानून  बेचारा  नाज़ुक  रहा ,
न्याय  तौलता  हर  बार  फिरे,
अन्याय  न  हो,  इसका  भी  ध्यान  धरे,
यह   एक   खेल    देखिये

कब  तुली  चीख़   बेटी   की ,
क्या  यह  न  उसको  ध्यान  रहा,
अँधा  बन  सबूत  रहा  खोज,
क्या यह न उसका  अभिमान रहा,
अभिमानी की एक और मिसाल देखिये।

लाचार   बाप   बना   क़ानून,
बच्चों  को  कब  ख़ौफ़   रहा,
माँ   न्याय  की  मूरत   रही,
आँखों पर पट्टी,जैसा  दिखा  रहे,
  वैसा  देख  रही,
मूरत   ममता  की,  यह  भी  देखिये ।


जंगल  रहा   संगसार  यह,
 हर  प्राणी जानवर,
मुखौटा  सब  का  एक,
पहचान  हो  कैसे   विपदा  बड़ी   नेक,
इस विपदा का भी कोई  हल दीजिये ?



गुरुवार, 2 अगस्त 2018

हाइकु रचना


प्यार  से  पाला 
गिरवी  रख  दिया 
तंग   पेट   ने ।

........


भूख  ने  मोड़ा 
ज़रुरत  ने  तोड़ा 
  न  नूर   छोड़ा  ।
....

मन  बहका
तन  ठोकर  खायें
मैं   सुख  ढूँढूँ |
......

वक़्त ने तोड़ा
हिम्मत ने जोड़ा 
कर्म  संग  दौड़ा ।
......

आँखों  में  नमीं 
आँचल  में   छीपायें 
हँसती   जाये ।

....

बुधवार, 1 अगस्त 2018

अमर प्रेम

  
दोहे 
                                        
विश्वास  ज्योति  प्यार  की,उजियारा  चहुँ ओर |
दामन थामा  जी  मन ने ,मिली  प्रीत   की  डोर ||

प्रेम  प्रीत  में बावरी,लिखे  मीरा  ने  पद |
अमर प्रेम मीरा अरु,मीरा  प्रीत  में  मद ||

चाहत  मेरी  एक तुम,एक तुम्हीं  अरमान |
रग-रग में तुम हो बसे,है  तुम पर अभिमान ||


बात सुनो प्रिय राधिका, मुझको अपना जान |
जब से देखा नैन भर, अर्पित तब से प्राण ||

हारी दिल अपना सखी,कान्हा तो चितचोर
एक उसी का नाम जप, होती है नव भोर ।।

- अनीता सैनी

अकिंचन ...

समय  की  मार  से,
अपनों  के  प्रहार  ने,
कुछ   देने  की  चाह,
भविष्य  की  मुस्कान  ने,
नोच  लिया  आज,        
कल के  ताक़  पर।

आज  के बाशिंदे,   
कल समय के  गुलाम,
खुश  रखने  की  चाह ने,
नोच   लिया  बचपन ।
  
दिखावे   की  मार  ने,
संस्कारों  की  आड़  में,
बचपन  गिरवी   रखा ,
अकिंचन  बना  दिया,
न  जी  सका    आज ,
रही  कल  की  प्यास |

  #अनीता  सैनी