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बुधवार, अगस्त 1

अमर प्रेम

  
दोहे 
                                        
विश्वास  ज्योति  प्यार  की,उजियारा  चहुँ ओर |
दामन थामा  जी  मन ने ,मिली  प्रीत   की  डोर ||

प्रेम  प्रीत  में बावरी,लिखे  मीरा  ने  पद |
अमर प्रेम मीरा अरु,मीरा  प्रीत  में  मद ||

चाहत  मेरी  एक तुम,एक तुम्हीं  अरमान |
रग-रग में तुम हो बसे,है  तुम पर अभिमान ||


बात सुनो प्रिय राधिका, मुझको अपना जान |
जब से देखा नैन भर, अर्पित तब से प्राण ||

हारी दिल अपना सखी,कान्हा तो चितचोर
एक उसी का नाम जप, होती है नव भोर ।।

- अनीता सैनी

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