मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

क्षणिकाएँ



                                              


                                  ||  मति  ||
                                        
                           सागर   में  दरिया  बनाती,  
                            दर्द   में   मीठी   झंकार, 
                          मुखरित   जीवन  पथ  करे,  
                            यही   मति   का  प्यार |

                         लाचारी   को  दूर  भगाये,  
                        गुनगुनाये  जोशीले  गीत, 
                 हृदय  में  पनपाये   उत्साह  के  बीज, 
                      मानव   मस्तिष्क  की भीत |


                                ||करुणा ||
                                     
                          कर्म    पथ   को  सींचती, 
                           सुख  वैभव   परित्याग, 
                         पत्थर   से   भी   प्रीत  करे, 
                        करुणा  हृदय  का  अनुराग |

                         मानवता  का  अदृश्य  गहना, 
                          शब्दों   में   प्रीत  आलाप, 
                           नयनों  में  बैठी  मुस्काए, 
                          मानव   हृदय   का  विलाप |


                                    ||  प्रीत ||
                                            
                         मति करुणा  का  अनूठा  संगम, 
                             मानव   मन   का  उद्धार, 
                          खोज  रहा  घट - घट  हृदय में,  
                            बैठी   मानव   मन   के  द्वार |

                          मानव   ने  दामन  छोड़  दिया, 
                       क्रोध   हुआ,  हृदय  पर   सवार, 
                           तृष्णा  ने  डेरा  डाल  दिया, 
                          प्रीत  से   हुआ   दुर्व्यवहार  |

                               -  अनीता सैनी 

39 टिप्‍पणियां:

व्याकुल पथिक ने कहा…


तृष्णा ने डेरा डाल दिया
प्रीत से हुआ दुर्व्यवहार

जी सुंदर भाव , प्रणाम।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय आप का
त्वरित टिप्णी एवं हौसला बढ़ने के लिए |
सादर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (20-02-2019) को "पाकिस्तान की ठुकाई करो" (चर्चा अंक-3253) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

पत्थर से भी प्रीत करें
करुणा ह्रदय का अनुराग
मानवता का अदृश्य गहना
शब्दों में प्रीत आलाप
नयनों में बैठी मुस्काए
मनु ह्रदय का विलाप |
बेहतरीन लेखन,आदरणीय अनीता जी। बहुत-बहुत बधाई ।

deepshikhaaj ने कहा…

बहुत ही बढ़िया लिखा है सखी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन क्षणिकाएं सखी सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत सा स्नेह सखी आप को
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी अनुराधा जी - बहुत सा स्नेह आप का
आभार
सादर

Sudha devrani ने कहा…

कर्म पथ को सींचती
सुख़ वैभव परित्याग
पत्थर से भी प्रीत करें
करुणा ह्रदय का अनुराग
बहुत ही सुन्दर ,लाजवाब क्षणिकाएं...

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर क्षणिकाएं

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी सुधा जी - स्नेह आभार आप का सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय मार्गदर्शन के लिए | आशीर्वाद बनाए रखे |
आभार
सादर

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

अनीता जी, अब तो आप सूक्तियां कहने लगीं ! हम पापियों का उद्धार अब आपके ज़िम्मे !

मुकेश सैनी ने कहा…

अति सुन्दर जी।

अनीता सैनी ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय बहुत अच्छा लगा आप की टिप्णी मिली |सर मन के भावों को शब्दों में पीरों देती हूँ, सुकून मिलता है| आप को रचना पसंद आई बहुत अच्छा लगा | सह्रदय आभार आदरणीय |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आप का
सादर

drindira .blogspot .com ने कहा…

वाह वाह अनीता जी अप्रतिम लेखन 👍👍👍👍👍👍👍👍

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी इंद्रा गुप्ता जी शुभ प्रभात |आप को बहुत सा सस्नेह |और उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए तहे दिल से आभार |
सादर

Yogi Saraswat ने कहा…

एक से एक खूबसूरत और सटीक क्षणिकाएं

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय योगी जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है |सह्रदय आभार उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत ही सुंदर सखी ,स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय सखी कामिनी जी - बहुत सा स्नेह आप को |
सादर

मन की वीणा ने कहा…

वाह सखी अति उत्तम भावों का सुंदर प्रवाह लिये अप्रतिम लेखन।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |आप को बहुत सा स्नेह |प्रणाम
सादर

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तूति, अनिता दी

दिगंबर नासवा ने कहा…

मति करुना प्रीती ...
हर भाव में में अलग रंग ... शब्दों का प्रवाह लाजवाब ... बहुत सुन्दर ...

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय ज्योति बहन आप को बहुत सा स्नेह | इतनी सुन्दर टिप्णी के लिए तहे दिल से आभार सखी |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय दिगम्बर नस्वा जी - तहे दिल से आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए | प्रणाम स्वीकार करें
सादर

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,

आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
गुरुवार 21 फरवरी 2019 को प्रकाशनार्थ 1315 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।

प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
सधन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय" पाँच लिंकों का आनंद" में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

Kavita Saini ने कहा…

Mast di

अनीता सैनी ने कहा…

Thanks sis. . .