गुरुवार, 2 जुलाई 2020

सरहद



 स्वयं का नाम सुना होगा सरहद ने जब
  मोरनी-सी मन ही मन हर्षाई होगी।
अस्तित्त्व अदृश्य पानी की परत-सा पाया
भाग्य थाम अँजुली में इतराई होगी। 

मंशा मानव की झलकी होगी आँखों में जब
आँचल में लिपटी अपने बहुत रोई होगी।
आँसू पोंछें होंगे जब सैनिक ने उसके
प्रीत में बावरी दिन-रैन न सोई होगी। 

क़िस्से कहे होंगे सैनिक ने घर के अपने
सीने से लगकर अश्रु दोनों ने बहाए होंगे ।
कंकड़-पत्थर संग आघात सीसे-सा पाया
मटमैले स्वप्न दोनों ने नैनों में धोए होंगे।
 

अनीता सैनी 'दीप्ति '

28 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 02 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर आभार आदरणीय दिव्या जी संध्या दैनिक में स्थान देने हेतु .

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  2. bahut acha varnan kiya hai aap ne anita ji. sarhad or sainik ki dosti ka. acha likh rahi ho, likhate raho......

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    1. सादर आभार आदरणीय उत्साहवर्धन प्रतिक्रिया हेतु.
      सादर

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  4. इंसान ने बना दी सरहद
    सुन्दर सृजन

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    1. सादर आभार आदरणीय मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
      सादर

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  5. बहुत ही सुन्दर रचना

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    1. सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
      सादर

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  6. वाह!बहुत खूबसूरत सृजन सखी ।ये सरहदें तो मानवनिर्मित हैं ..पंछी ,नदियाँ पवन के झोंके ,कोई सरहद ना उन्हें रोके ..।

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    1. सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
      सादर

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  7. "क़िस्से कहे होंगे सैनिक ने घर के अपने

    सीने से लगकर अश्रु दोनों ने बहाए होंगे ।
    कंकड़-पत्थर संग आघात सीसे-सा पाया
    मटमैले स्वप्न दोनों ने नैनों में धोए होंगे।".....

    शानदार पंक्तियाँ !
    इंसानी महत्त्वाकाँक्षाओं ने सरहदों का सृजन किया है।
    अक्सर कोई नदी या पर्वत सरहद निर्धारित करते हैं।

    सरहदों की रक्षा करते सैनिक गर्व से फूले नहीं समाते हैं।

    रचना में सरहद और सैनिक के बीच अत्यंत पावन और मार्मिकता से परिपूर्ण संबंध चित्रित हुआ है जो सीधा मर्म को छू लेता है।

    भावप्रवण उत्कृष्ट रचना।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय आपकी मनोबल बढ़ाती सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
      सादर

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  8. बेहतरीन सृजन सखी।

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    1. सादर आभार आदरणीय सुजाता जी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
      सादर

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  9. अनुपम रचना प्रिय अनिता जी👌👌

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    1. सादर आभार आदरणीया उर्मिला दीदी उत्साहवर्धन हेतु .
      सादर

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  10. मंशा मानव की झलकी होगी आँखों में जब
    आँचल में लिपटी अपने बहुत रोई होगी।
    आँसू पोंछें होंगे जब सैनिक ने उसके
    प्रीत में बावरी दिन-रैन न सोई होगी। बेहद मर्मस्पर्शी रचना सखी

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    1. सादर आभार आदरणीय अनुराधा दीदी उत्साहवर्धन हेतु .
      सादर

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  11. आँसू पोंछें होंगे जब सैनिक ने उसके
    प्रीत में बावरी दिन-रैन न सोई होगी। ...
    सरहद का दर्द छलक आया इन पंक्तियों में..बहुत ही मर्मस्पर्शी सृजन अनीता ।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय मीना दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु .
      सादर

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  12. सुन्दर प्रस्तुति

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    1. सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाने हेतु .
      सादर

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  13. क़िस्से कहे होंगे सैनिक ने घर के अपने
    सीने से लगकर अश्रु दोनों ने बहाए होंगे ।
    कंकड़-पत्थर संग आघात सीसे-सा पाया
    मटमैले स्वप्न दोनों ने नैनों में धोए होंगे।
    सरहद और सैनिक की दोस्ती !!!!
    क्या बखत....
    आपका कल्पनाशक्ति का भी जबाब नहीं...
    कमाल का सृजन।
    वाह!!!

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    1. आपका स्नेह आशीर्वाद ऊर्जा है मेरी आदरणीय दी.मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु सादर आभार .

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  14. सरहद पर बहुत ही सुंदर हृदय स्पर्शी रचना हर शब्द अंदर तक उतरता, सरहद और सैनिकज्ञका आपने ऐसा भाव मीना नाता उकेरा है अनायास सरहद पर खड़े एकाकी वीर की मनोदशा दिमाग पर मचल उठी।
    सच भी है दायित्वों से घिरे अकेले पन के साथी प्रकृति की कोई भी शै हो सकती है ये तो जान से प्यारी सरहद है ।
    भावों से सुसज्जित सुंदर सृजन।

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    1. आदरणीय दी आपकी प्रतिक्रिया का हमेशा इंतजार रहता है.शब्दों में शीतलता मेरे मन को भी शीतल कर जाता है.
      मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु सादर आभार .

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