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मंगलवार, जून 15

घुट्टी



उतावलेपन में डूबी इच्छाएँ
दौड़ती हैं
बेसब्री-सी भूख की तरह
 प्रसिद्धि के लिबास में
आत्मीयता की ख़ुशबू में सनी 
पिलाने मर्म-स्पर्शिनी
उफनते क्षणिक विचारों की
घोंटी हुई पारदर्शी घुट्टी
और तुम हो कि
निर्बोध बालक की तरह
भीगे कपासी फाहे को
होठों में दबाए
तत्पर ही रहते हो पीने को
अवचेतन में अनुरक्त हैं 
विवेक और बुद्धि 
चिलचिलाती धूप का अंगवस्त्र 
कंधों पर रहता है तुम्हारे
फिर भी 
नहीं खुलती आँखें तुम्हारी
भविष्य की पलकों के भार से
अनजान हो तुम
उस अँकुरित बीज की तरह
जिसका छिलका अभी भी
रक्षा हेतु उसके शीश पर है
वैसे ही हो तुम
कोमल बहुत ही कोमल
नवजात शिशु की तरह
तभी तुम्हें प्रतिदिन पिलाते हैं
भ्रमिक विचारों की घोंटी हुई घुट्टी।

@अनीता सैनी 'दीप्ति'

42 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!बहुत खूब !!
    चिंतनपरक सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय दी।
      सादर

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  2. छिलका हटेगा तो अक्ल आएगी और फिर प्रतिदिन भ्रमिक विचारों की घोंटी हुई घुट्टी पीने से बचे रहेंगे
    बहुत सुन्दर

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    उत्तर
    1. सही कहा आपने।
      आभारी हूँ आपकी प्रतिक्रिया से सृजन को प्रवाह मिला।
      सादर

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  3. सच्चाई से अवगत कराती गहरे अर्थों को समोए अद्भुत रचना

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    1. आभारी हूँ।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  4. प्रसिद्धि के लिबास में
    आत्मीयता की ख़ुशबू में सनी
    पिलाने मर्म-स्पर्शिनी
    उफनते क्षणिक विचारों की
    घोंटी हुई पारदर्शी घुट्टी
    और तुम हो कि
    निर्बोध बालक की तरह
    भीगे कपासी फाहे को
    होठों में दबाए
    तत्पर ही रहते हो पीने को
    एक तो प्रसिद्धि ऊपर से आत्मीयता ...बस ये तो सबको बड़े संत जान पड़ते हैं। उनके क्षणिक विचारों के घुट्टी पीने में संशय तक नहीं कर पाती भोली जनता...।
    वाह!!!
    बहुत ही लाजवाब सृजन।

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    1. आभारी हूँ सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु सृजन का मर्म स्पष्ट करने हेतु दिल से आभार आदरणीय सुधा दी जी।
      सादर

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  5. उतावलेपन में डूबी इच्छाएँ

    दौड़ती हैं

    बहुत ही सुन्दर सृजन

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  6. बहुत ही सुन्दर सृजन, अनिता।

    जवाब देंहटाएं
  7. आज के समय की कटु सच्चाई बयां करती उत्कृष्ट रचना ।

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय जिज्ञासा दी जी प्रतिक्रिया से संबल प्राप्त हुआ।
      सादर

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  8. विचारोत्तेजक अभिव्यक्ति है यह आपकी अनीता जी। इसे पढ़ना ही पर्याप्त नहीं; इसे गुना भी जाना चाहिए, आत्मसात् भी किया जाना चाहिए।

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    1. आभारी हूँ आदरणीय जितेंद्र माथुर जी सर सारगर्भित प्रतिक्रिया से सृजन को प्रवाह मिला।
      सादर

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  9. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार (18-06-2021) को "बहारों के चार पल'" (चर्चा अंक- 4099) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ मीना दी चर्चामंच पर स्थान देने हेतु।
      सादर

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  10. बहुत ही सुंदर सृजन

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  11. बहुत ही उम्दा ।
    अच्छे औऱ सच्चे विचार ।

    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ सर।
      प्रतिक्रिया से संबल प्राप्त हुआ।
      सादर

      हटाएं
  12. कोमल बहुत ही कोमल
    नवजात शिशु की तरह
    तभी तुम्हें प्रतिदिन पिलाते हैं
    भ्रमिक विचारों की घोंटी हुई घुट्टी।

    सुंदर सृजन प्रिय अनीता जी

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  13. बहुत सुंदर रचना सखी 👌

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अनुराधा दी।
      सादर

      हटाएं
  14. भ्रमित विचारों की घुट्टी पिलाना !
    वाह अनीता !
    बड़ी गहरी चोट करने वाला अभिनव प्रयोग !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आभारी हूँ सर आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला।
      मार्गदर्शन करने हेतु दिल से आभार।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  15. मर्म तक उतरता उद्बोधन।
    चिलचिलाती धूप का अंगवस्त्र
    कंधों पर रहता है तुम्हारे
    फिर भी
    नहीं खुलती आँखें तुम्हारी।
    सटीक प्रहार, शानदार प्रतीकात्मक शैली।
    काश आँखे खुल पाती।
    सुंदर सृजन।

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ आदरणीय कुसुम दी जी आपकी प्रतिक्रिया से सृजन को प्रवाह मिला।स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

      हटाएं
  16. वाह!बहुत सुंदर।
    चुप्पी के पीछे का राज बहुत पसंद आया।
    लिखती रहो ।

    जवाब देंहटाएं
  17. भ्रमित विचारों की घुट्टी पियो या न पियो यह समाज के सामूहिक व्यवहार पर निर्भर है.
    जब तक लोग भ्रमित विचारों की घुट्टी का निहितार्थ समझ पाते हैं तब तक घुट्टी का निर्माण करनेवाले ठेकेदार नए कलेवर और स्वाद की महाभ्रामक घुट्टी से समाज को दिग्भ्रमित करने लगते हैं.
    समाज के दोहरे चरित्र पर व्यंग्य की छटा बिखेरती विचारणीय रचना.

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    उत्तर
    1. आभारी हूँ सर सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।
      आशीर्वाद बनाए रखे।
      सादर

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  18. वाह। बहुत बढ़िया🙏

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