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गुरुवार, 10 जनवरी 2019

हिंदी



                           


मन से निकली साज़, महकी बन ममत्व की आवाज़ ,
गूंज रही कण -कण में, बन मधुर वर्ण कंठ का राज |


क़दमों  में थिरकती ताल, कंठ संजे सुन्दर साज़ ,
मधुर  वर्ण बन निखरी,  हिंदी  ह्रदय  का  ताज़ |


मोहब्बत में लिखा फ़रमान , हाले  दिल ने किया बखान, 
हिंद  देश  की  हिंदी,  मिला  मातृत्व   का  सम्मान |


हाथ थामे रखना, कभी   चाहत को न क़ुर्बान करना,
लबों  पर सजाये रखना,  यूँ  बेगाना  पन  न  दिखाना |



ठुकरा  रहे  हो  ममत्व,   कल  फिर  लौट  आओगें ,
ग़ुमराह हुए  जिंदगी  की  राह में, तलाश  में  मेरी नज़र आओगें |

                                    -अनीता 


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