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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

विज्ञान की महिमा


                                                      
पत्थर के पेड़ हरे होगें 
मानव  ज्ञान  की  राह  चला 
धरा  का  सीना  छल्ली  कर  
लेने  उस  की     थाह  चला  

न पतझड़ ,न बसंत  का इंतज़ार  
 धरा  का  दामन  होगा  भरा 
      फूलों का होगा ढ़ेर 
  दर्द  में  डूबी  होगी  धरा 

भवरों के भिनभिनाने का भार 
न फूलों को लेना होगा 
फूलों को अपना अस्तित्व 
ताक पर रख  देना  होगा 

रंगों में  लिपटे होगें    फूल  
नजारो  में  होंगी  रंगीनियत 
    फूल  होगें  पत्थर के 
न  होगी  फूलों  में  मासूमियत 

फूलों  से  सुन्दर  फूल  होगें पर 
फूलों  में  वो  खुशबू  न  रहेगी 
पत्थर  की   वरमाला  होगी 
पत्थर  से  फ़िर  सेज   सजेगी 

आवतों  ने बुना जाल 
बुद्धि की  यही  कलाकारी
विज्ञान-यान  पर सवार मानव 
ख़ोज है यह चमत्कारी 

दौड़ रहा मस्तिष्क मानव का
 हृदय पर की सवारी 
शीतलता की राहत होगी 
प्रगति की आई बारी 

धरा को पत्थर फूल से सजाया 
सूरज चाँद पर  जाने की  तैयारी 
मानव  चला  प्रगति  की  राह 
विज्ञान  की  यह   महिमा  सारी |
  
           - अनीता सैनी 

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ......, सुन्दर सृजन अनीता जी 👌👌

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति, अनिता दी।

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  3. पत्थर के पेड़ हरे होगें
    .
    बेहतरीन मैम... ओजपूर्ण पंक्ति

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (03-04-2019) को "मौसम सुहाना हो गया है" (चर्चा अंक-3294) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में स्थान देने के लिए
      सादर

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  5. दमदार¡ आने वाले दिनों का भयावह चित्रण सखी दुखद पर चिंतन परक।
    बहुत सार्थक।

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  6. बहुत खूब। पत्थर के पेड़ हरे होंगे। क्या बात है। सार्थक रचना। सादर।

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  7. प्रिय अनिता --ज्ञान और विज्ञानं के तर्क प्रस्तुत करती सशक्त रचना |सब कुछ पत्थर का होगा तो कहाँ मन भी लचीला रहेगा | वह भी तो पत्थर का होगा | सार्थक रचना के लिए शुभकामनायें |

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आदरणीय/आदरणीया, स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद,