बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

नियति बन महके


                                                        
                   शब्द  मधुर  हों  जनमानस  के, 
                    दिखा  नियति  ऐसा कोई  खेल, 
                   करुण  हृदय  से  सींचे  प्रीत  को, 
                     फूले-फले   प्रीत  की    बेल  |

                      प्रज्वलित  हो  दीप  ज्ञान  का, 
                     साँझ की मधुर निश्छल   छाया  में, 
                      ढुलकता   मोह   मनुज  नयन  से, 
                      बंजर  मानवता  महके   प्रीत   में |

                        सुख-दुःख दोनों कर्म  के  साथी, 
                       श्रम-विश्राम  का उदीप्त यही  खेल, 
                          नीलाअंबर के  निश्छल  नयन से, 
                       गूँथे तारिकाओं  संग श्रम की  बेल |

                       मानवता की मधुर गंध भीगे  प्रीत से,  
                                  भीनी-भीनी  महके,  
                          अनुराग हृदय में नूपुर बन खनके, 
                             रहे  धरा पर  तृप्त  लालसा, 
                                 श्यामा   शृष्टि   महके |

                                         - अनीता सैनी 

30 टिप्‍पणियां:

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

अनीता जी, युद्धोन्माद के कोलाहल के मध्य अनुराग और मानवता का आपका सन्देश, ह्रदय को शांति तथा शीतलता प्रदान कर रहा है.

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय | मन बहुत विचलित है मानवता का यह हाल नहीं देखा जा रहा | कहने को शब्द नहीं. ...
मन में तूफ़ान उठा है |
आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

बहुत सुंदर प्रेरित करती पंक्तियां

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

मानवता की मधुर गंध भीगे प्रीत से
भीनी भीनी महक़े
अनुराग ह्रदय में नूपुर बन खनके
रहे धरा पर तृप्त लालसा
श्यामा सृष्टि महके |
बहुत सुंदर रचना सखी

Himkar Shyam ने कहा…

बहुत सुंदर

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 01 मार्च 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन आदरणीया
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया दी " पांच लिंकों का आनन्द में" मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत सुंदर रचना अनिता जी।

व्याकुल पथिक ने कहा…

बहुत सुंदर और समसामयिक रचना

वैसे हम भारतवासी सदैव शांतिप्रिय रहे हैं, फिर भी पाकिस्तान जैसा कुटिल और दुष्ट राष्ट्र,हमारे इस मानवीय गुण को हमारी कमजोरी समझ बैठता है और शेष कार्य हमारे राजनेता पूरा कर देते हैं।
प्रणाम।

Nitish Tiwary ने कहा…

शुद्ध हिंदी की शानदार काविता के लिए आपको बधाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (01-03-2019) को "पापी पाकिस्तान" (चर्चा अंक-3262)) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अनीता सैनी ने कहा…

जी सह्रदय आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सही कहा आप ने आदरणीय हित अहित के साथ चलते सभी चाणक्य बन गए | ये भी नहीं सोचते की क्या कह रहे है और क्या कर रहे है | आज भारत में भी राजनीति के अंकुर काफ़ी फलफूल रहे है | सह्रदय आभार आप का उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए |
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धन
टिप्णी के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सह्रदय आभार आदरणीय चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए |
सादर

नूपुरं noopuram ने कहा…

अनुराग ह्रदय में नूपुर बन खनके ....

अनीता जी, इस पंक्ति पर तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार बनता है !
अतः अन्यथा ना लें !
यह तो चोरी हो गई ! रपट लिखा दें भले !

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय नूपुरम जी आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है आप के शब्द हम अन्यथा क्यों लेगे, पाठक ही लेखक का मान है | ठिक कहा आप ने "अनुराग ह्रदय में नूपुर बन खनके "
इस पंक्ति पर तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है |
यही भाव है मेरे, मेरे साथ जन मानस के कहीं खो गए | ये मेरा आग्रह है उन लोगो से ,हमें और श्रष्टि को वापस लौटा दे | ये मेरी रचना नहीं यह आह्वान है श्रष्टि का, वसे पाठक के अपने भाव होते है वो उसे किस रुप में ग्रहण करें |
बहुत अच्छा लगा आप ब्लॉग पधारे ,
साथ बनाये रखे |
सस्नेह आभार आप का 🙏🙏
सादर

Sudha devrani ने कहा…

सुख़ दुःख दोनों कर्म के साथी श्रम विश्राम का उदीप्त यही खेल
नील अंबर के निश्छल नयनसंग गूंथें तारिकाओं संग श्रम की बेल |
वाह!!!
लाजवाब रचना.....

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार सखी आप का,
आप का साथ बना रहे
सादर

deepshikhaaj ने कहा…

अति उत्तम सखी।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर भाव सखी ,लाजबाब रचना ,तुम्हारी रचनाये तो बेहतरीन होती हैं ,काफी दिनों से ब्लॉग पर आना नहीं हो पा रहा हैं मन तो यूँ देश के हालत से विचलित सा रहता है ,ढेर सारा स्नेह तुम्हे

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय कामिनी बहन आप का उत्साह ही है जो क़दमों गति प्रदान करता है |आप को बहुत सा स्नेह |सखी G+ के बंद होने की संभावना से सभी fb पर आ गये | पर आप नज़र नहीं आई | आप का तहे दिल से आभार, साथ बना रहे |
आभार
सादर