शुक्रवार, 15 मार्च 2019

विरह


                                                  
होंठों  की  मुस्कान  से तुम, 
आँख  का  पानी  छुपाओगी, 
हृदय  की  पीड़ा, 
धड़कनों को न बताओगी, 
साँसों     में  जी  उठेगी  बेचैनी ,
तुम उसे  कैसे  बहलाओगी  ?

धड़कनों को  समझाने, लौट आऊँगा, 
मीठी मुस्कान से दिल जलाऊँगा  |

भाग्य बन  मैं  तेरा, 
भाग्यशाली  कह  बुलाऊँगा |

वेदना यूँ  किसी को,  सानिध्य से निहाल नहीं करती,  
ज़रुर   पुण्य   से   लिये तूने  फेरे |

आँसुओं से धोती  हो पद मेरे, 
  प्रबल  प्रेम संग बैठा  हूँ मैं  दामन  में   तेरे |

यूँ गोद में बिठा निहाल नहीं करती वेदना, 
समेटे  बैठे  हो हृदय में सागर, 
मुस्कुरा देती   हो  सवेरे |

नदी की धार-सी बहती वेदना,  
साँसों से कैसे रोक पाओगी ?
न समझाऊँगा तुझे  कि ,
यही  पुण्य  है  जीवन  का तेरे |

मैं जी रहा हूँ तुझमें, 
तुम  जीने  की  इच्छा तौल  रही, 
दौड़  रहा  हूँ  मैं  समय से तेज़,  
तुम सूखे पत्तों में तलाश रही जीवन मेरा |
     
                - अनीता सैनी 

34 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

विरह वेदना की भावाभिव्यक्ति करती एक शानदार रचना

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! बहुत उम्दा रचना!

Anuradha chauhan ने कहा…

विरह की बेहतरीन अभिव्यक्ति सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय लोकेश जी
सादर नमन

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी उत्साहवर्धन टिप्णी के लिए
सादर नमन

मन की वीणा ने कहा…


नदी की धार सी बहती वेदना
साँसों से कैसे रोक पाएगी ?
न समझाउँगा तुझे कि
यही पुण्य है जीवन का तेरे
बहुत गहनता लिये भाव रचना सखी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

Nitish Tiwary ने कहा…

वाह! बहुत सुंदर प्रस्तुति।
नयी पोस्ट- इश्क़ और कश्मीर।
iwillrocknow.com

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय नितीश तिवारी जी तहे दिल से आभार आप का
सादर नमन

https://www.kavibhyankar.blogger.com ने कहा…

अति सुंदर रचना आपकी कलम सदा आकाश को छुती रहे बिटिया

Unknown ने कहा…

मर्मस्पर्शी चिंतन चित्रण अविस्मरणीय औ अभिनंदनीय है।
जी सादर धन्यवाद सुप्रभातम् जय श्री कृष्ण राधे राधे जी।
🙏 👏 🙏

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-03-2019) को "पन्द्रह लाख कब आ रहे हैं" (चर्चा अंक-3277) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

वाह !....लाजवाब

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना......

Sudha devrani ने कहा…

मैं जी रहा हूँ तुझ में
तुम जीने की इच्छा तौल रही
दौड़ रहा हूँ मैं समय से तेज़
तुम सूखे पत्तों में मेरा जीवन तलाश रही
बहुत सुन्दर विरह भावाभिव्यक्ति....

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
सादर नमन

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर नमन

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए
सादर नमन

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय
सादर नमन

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार कामिनी बहन
आप को बहुत सा स्नेह
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया
सादर नमन

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया

deepshikhaaj ने कहा…

अति उत्तम सखी।

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
१८ मार्च २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार श्वेता जी
सादर

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया

अनीता सैनी ने कहा…

प्रणाम आदरणीय
सादर नमन

रेणु ने कहा…

प्रिय अनीता-- आपकी ये रचना मुझे खासतौर पर पसंद आई | बहुत ही संवेदनशील रचना है जो विरह की पीड़ा को बखूबी व्यक्त करती है --
दौड़ रहा हूँ मैं समय से तेज़
तुम सूखे पत्तों में तलाश रही जीवन मेरा !!!!!
बहुत खूब और वाह !!! सस्नेह शुभकामनायें और मेरा प्यार |

दिगंबर नासवा ने कहा…

विरह के पलों को मासूमियत से समेटा है ...
जीवन की आशा निराशा के पल बांधे हैं रचना में ... बहुत खूब ...

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार रेणु बहन
होली की हार्दिक शुभकामनायें आप को
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
होली की हार्दिक शुभकामनायें आप को
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर