शुक्रवार, 17 मई 2019

देव दूत पूनम की छाँव



मृगमरीचिका  के  चिर   पथ पर, 
 सृष्टि  ने   किया  भावों  का  शृंगार |

कलपा   सृष्टि  ने  सूने  मन  को, 
 उपजी  उर  में  करूणा  अपार, 
 ममता  मन  में  मचल  उठी, 
दिया  मानव  को   रूप  साकार, 
करुण -काव्य   बहा  अंतरमन में, 
सृजा   सृष्टि  ने  मानवावतार |

शब्द-शब्द  का  सार  पढ़ा, 
गढ़ा  मन  का  उद्गार,  
पुलिकत  मन  के तार हुए, 
 मिटा हृदय  का  भार |

उर  से  उर  को  जोड़ती, 
 उर  के  कोमल  तार |

मानस  चोला   प्रीत  का, 
स्नेह ,करूणा  का गढ़ा  मोहक  दाँव, 
पहन  चोला  निखरा  मानव, 
 लगे   देव-दूत  पूनम  की  छाँव |

गर्वित   हृदय   सृष्टि   का, 
 मानव  मन  में  सुन्दर  संस्कार |

मानवता  की  निर्मल  महक, 
महका  सृष्टि  का  घर-द्वार, 
एक सूत्र  में  बँधा  मानव, 
सजा  उर  पर  मुक्ता-हार  |

पथ-पथ  पर  प्रीत  खिली,  
जीवन-मर्म  महका, 
उर  के  उस  पार |

- अनीता सैनी 

40 टिप्‍पणियां:

अमित निश्छल ने कहा…

शब्द - शब्द का सार पढ़ा
गढ़ा मन का उद्गार
पुलिकत मन के तार हुये
मिटा हृदय का भार

अद्भुतं, अद्भुतं। शानदार भावाभिव्यक्ति मैम।

विश्वमोहन ने कहा…

बहुत सुंदर शब्दों का सरगम।

उर्मिला सिंह ने कहा…

आपकी रचना की जितनी तारीफ़ की जाय कम है

Anuradha chauhan ने कहा…

बेहतरीन रचना सखी 👌

लोकेश नदीश ने कहा…

वाहः बहुत ही लाजवाब

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सुन्दर और भावप्रणव गीत।

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार मई 20, 2019 को साझा की गई है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

मन की वीणा ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर काव्य धारा सुंदर शब्दों का गहन ताना बाना ।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

जीवन के कठिन सवालों पर विमर्श को आमंत्रित करती सुन्दर अभिव्यक्ति।

रेणु ने कहा…

मानवता की निर्मल महक
महका सृष्टि का घर - द्वार
एक सूत्र में बँधा मानव
सजा उर पर मुक्ता- हार
सुंदर सार्थक सृजन प्रिय अनीता !!!!!!!! कोमल शब्दावली मनमोहक है | सस्नेह --

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19 -05-2019) को "हिंसा का परिवेश" (चर्चा अंक- 3340) पर भी होगी।

--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
....
अनीता सैनी

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

सुन्दर भावों से सजी रचना

Jyoti Dehliwal ने कहा…

मानवता की निर्मल महक
महका सृष्टि का घर - द्वार
एक सूत्र में बँधा मानव
सजा उर पर मुक्ता- हार
बहुत सुंदर।

Alaknanda Singh ने कहा…

मानस चोला प्रीत का
स्नेह ,करूणा का गढ़ा मोहक दाँव
पहन चोला निखरा मनु
लगे देव - दूत पूनम की छाँव...बहुत...बहुत...बहुत ही सुदर कविता अनीजा जी

Meena Bhardwaj ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया आप का निश्छल जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय विश्वमोहन जी आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय उर्मिला दी जी सस्नेह आभार आप का उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय अनुराधा दी जी, तहे दिल से आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय लोकेश जी सहृदय आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय यशोदा दी जी, सस्नेह आभार आप का पाँच लिंकों में मेरी रचना को स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय कुसुम दी जी सस्नेह आभार आप का उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आदरणीय रविन्द्र जी तहे दिल से आभार आप का रचना का गहनता से अध्ययन करने और सुन्दर समीक्षा हेतु
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय रेणु दी जी आप के मन मोहक शब्द जिनका मैं समीक्षा अपने शब्दों में नहीं कर सकती, सस्नेह आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार चर्चा मंच
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रितु दी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय ज्योति बहन तहे दिल से आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय मीना जी
सादर

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता |

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

शब्द - शब्द का सार पढ़ा
गढ़ा मन का उद्गार
पुलिकत मन के तार हुए
मिटा हृदय का भार ...
बेहतरीन लेखन । मन की अभिव्यक्ति सहज और सुग्राह्य तरीके से कैनवास पर उतर आई है। बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ

अनीता सैनी ने कहा…

जी बहुत बहुत शुक्रिया
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय पुरुषोत्तम जी
सादर

Kamini Sinha ने कहा…

बेहतरीन सृजन.... सखी

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी कामिनी जी
सादर

रेणु ने कहा…

वाह !प्रिय अनिता तुम्हारा ब्लॉग मानो हरीतिमा से आच्छादित उपवन में कोई सफ़ेद चादर बिछाकर आराम कर रहा हो | अत्यंत नयनाभिराम , मनभावन थीम लगायी है तुमने | हार्दिक स्नेह के साथ मेरी शुभकामनायें |

Sudha devrani ने कहा…

मानस चोला प्रीत का
स्नेह ,करूणा का गढ़ा मोहक दाँव
पहन चोला निखरा मनु
लगे देव - दूत पूनम की छाँव
वाह!!!!
बहुत ही सुन्दर, सार्थक और लाजवाब सृजन

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी
आप ही के कहे अनुसार आप ही के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सुधा दी जी
तहे दिल से आभार आप का सुन्दर समीक्षा के लिए
सादर