सोमवार, 10 जून 2019

ड्योढ़ी पर बैठी इंसानियत



दृश्य  में  दृश्य, 
ड्योढ़ी   पर   बैठी   इंसानियत, 
  मटमैले  रंगों का पहन  परिधान,
ग़ुम  हो  रहे  अस्तित्व  का  लिये दर्द,
पीपल  के  सूखे  पत्तों  सी   सूख  रही |

आँखों  से  टपकती, मनोभावों की  पीड़ा,
समय  के  हाथों  अंकुरित  
संकीर्णता का बीज, 
अंतर्मन से, 
हैवानियत  के  लिबास  में  लिपटा  इंसान, 
इंसानियत   अपनी   खो   रहा |

दरकिनार  कर  सुकून  की  चंद  साँसें,
पीट  रही  अभाव  का  ढ़िढोरा,
बन भाग्य  विधाता,
जीवन  से   लिपटी   किस्मत  का 
ज्ञाता  कहलाने   में  मग्न हो रहा |

साँसों   के   बहाव   में  बहती  पीड़ा 
पल - पल  जूझ   रही  ख़्वाहिशें, 
बनी  अंतर्वेदना, 
उपजा  हिंसक  रूप  मानव   मन  में,  
इंसानियत  का  कर  रहा  क़त्ल  सरेआम,  
तृष्णा का  पुतला  धरा  पर  पनपा,  यही  गाथा,
वक़्त,   प्रकृति  के  कण - कण  को  सुना  रहा |

- अनीता सैनी 

34 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (12-06-2019) को "इंसानियत का रंग " (चर्चा अंक- 3364) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Puran Mal Meena ने कहा…

इतना बढ़िया लेख पोस्ट करने के लिए धन्यवाद! अच्छा काम करते रहें!। इस अद्भुत लेख के लिए धन्यवाद
gana download kaise kare

मन की वीणा ने कहा…

वाह बहुत ही सार्थक आज का अमानवीय होता मनु एक एक शब्द जैसे चित्कार कर रहा है।
इंसानियत तो आज ड्योढ़ी पर भी नही बैठी बहन तड़ी पार हो गई है भयावह चेहरा है समय का।

अप्रतिम अद्भुत लेखन।

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन सृजन सखी

मुकेश सैनी ने कहा…

सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सुन्दर गीत

पल्लवी गोयल ने कहा…

सुंदर शब्दों में पिरोए सार्थक भाव ... अद्भुत ।
सादर ।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आप का उत्साहवर्धन समीक्षा हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी सुन्दर समीक्षा हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय अभिलाषा दी जी
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी प्रणाम
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
प्रणाम
सादर

शुभा ने कहा…

वाह!! सुंदर भावाभिव्यक्ति सखी अनीता जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी शुभा जी
सादर स्नेह

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर रचना सखी

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह

संजय भास्‍कर ने कहा…

हैवानियत के लिबास में लिपटा इंसान,
इंसानियत अपनी खो रहा |
कड़वा सच अनीता जी

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय भास्कर भाई
सादर

सदा ने कहा…

वाह अनुपम

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर स्नेह

Unknown ने कहा…

हैवानियत की मरम्मत करती,
इंसानियत का पाठ पढ़ाती करती
भावाभिव्यक्ति सुखद औ सराहनीय है।
सुखद औ सराहनीय, अविस्मरणीय औ अभिनंदनीय है ।
जी सादर धन्यवाद सुप्रभातम् जय श्री कृष्ण जी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

रेणु ने कहा…

बहुत सुंदर और मर्मस्पर्शी रचना प्रिय अनिता | बढती हैवानियत ने इंसानियत को कदम कदम पर शर्मसार किया है | इंसानियत का मलिन रूप सचमुच बहुत वेदना देता है | सस्नेह शुभकामनायें | यूँ ही लिखती रहो |

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय रेणु दी जी
सादर स्नेह

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
१७ जून २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय श्वेता दी जी
सादर स्नेह

Puran Mal Meena ने कहा…

अति सुंदर पोस्ट

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आप का आदरणीय
सादर

Anuradha chauhan ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति 👌👌👌

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार दी
प्रणाम