गुरुवार, 11 जुलाई 2019

सुनो ! सावन तुम फिर लौट आना



 सुनो ! सावन तुम फिर लौट आना,

फिर महकाना मिट्टी को,

डाल-डाल पर पात सजाना, 

फिर बरसाना, बरखा  रानी  को |



पी  प्रीत  में  पूछूँ  प्रति  पल ,

अधर-विश्वास  न  देना  तुम ,

हँसी  अधरों  पर  लेते  आना ,

न  मायूसी  से  मिलना  तुम |



 चंचला  की  चमक  से, 

घटाएँ  गगन  पर  फिर  फैलाना,

इंद्रधनुष  के  रंगों  से , 

आँचल साँझ  का तुम  चमकाना  |


सुनो ! सावन तुम साथ निभाना, 

 लौट आना  तुम  पी  के  साथ, 

आँगन  फूलों  से  फिर  भर  देना, 

 जब  हों   चौखट पर  मेरे  नाथ |


कोयल की मीठी कूक ले आना, 

साथ पवन के अल्हड़ झोंकों को,

राह  निहारुँ   पल-पल तेरी ,

भूल न जाना आने को |

- अनीता सैनी 

26 टिप्‍पणियां:

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत उम्दा

मन की वीणा ने कहा…

वाह सरस सुंदर सावन की फूहार सी मनभावन अभिव्यक्ति।

Meena Bhardwaj ने कहा…

बेहतरीन और लाजवाब सृजन ।

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

सावन से सुहावना आग्रह करती मोहक अभिव्यक्ति.

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना

रवीन्द्र भारद्वाज ने कहा…

वाह
बेहतरीन
सुंदर भाव से ओतप्रोत

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ने कहा…

पी प्रीत में पूछूँ प्रति पल ,
अधर-विश्वास न देना तुम ,
हँसी अधरों पर लेते आना ,
न मायूसी से मिलना तुम |...
विरह, प्रेम और विश्वास साथ ही एक प्रश्न संयोजित मन का सुन्दर उन्वान। बहुत-बहुत सुंदर लेखन। बधाई व शुभकामनाएं ।

Anuradha chauhan ने कहा…

पी प्रीत में पूछूँ प्रति पल ,
अधर-विश्वास न देना तुम ,
हँसी अधरों पर लेते आना ,
न मायूसी से मिलना तुम |
बहुत ही बेहतरीन रचना सखी 👌

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया अनुज
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह

Sweta sinha ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना सोमवारीय विशेषांक १५ जुलाई २०१९ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

Sudha devrani ने कहा…

सुनो ! सावन तुम साथ निभाना,
लौट आना तुम पी के साथ,
आँगन फूलों से फिर भर देना,
जब हों चौखट पर मेरे नाथ |
वाह!!!
बहुत ही लाजवाब रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी श्वेता जी मुझे पाँच लिंकों में स्थान देने के लिए
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय दी जी
सादर स्नेह

दिगंबर नासवा ने कहा…

सावन आया है और ये मधुर एहसास ले कर आता है ...
भाव पूर्ण रचना ...

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
सादर

रेणु ने कहा…

सुनो ! सावन तुम साथ निभाना,
लौट आना तुम पी के साथ,
आँगन फूलों से फिर भर देना,
जब हों चौखट पर मेरे नाथ |
प्रिय अनीता , अत्यंत स्नेहिल और आत्मीय भावों से सावन को ये प्यारी सी मनुहार मन को छू गयी | मन के मधुर भावों से सजी इस रचना की जितनी सराहना करूं कम है---बस वाह और सिर्फ वाह !!!!!!! तुम्हारे इस बहुत ही सरस सृजन से मन मोह लिया है | मेरी शुभकामनायें और प्यार | ये हरियाला सावन तुम्हारे जीवन में यूँ ही रस बरसाता रहे --- मेरी दुआ है |

रेणु ने कहा…

ब्लॉग और भी प्यारा लग रहा है |

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय रेणु दी जी| तहे दिल से आभार आप का,आप की उत्साहवर्धन समीक्षा हमेशा ही,बहुत ही सराहनीय रहती है|
आप का स्नेह और सानिध्य यूँ ही बना रहे |
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

जी आभार दी जी
सस्नेह