समर्थक/Followers

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

देखो ! चरित्र-हत्या मत करो



नाज़ुक तन वक़्त के थपेड़ों से न थर्राया, 
देखो ! प्रति पल और निखरता गया,
मीरा पर भी हुआ था कुंठाओं  का  कुठाराघात,
देखो ! ता-उम्र बाँटती  रही प्रीत और प्रेम अमर होता गया |

चरित्र-हत्याओं का विस्तार विचारणीय हुआ अब,
देखो ! बात स्त्री पुरुष की नहीं
 यहाँ हनन जीवन मूल्यों का होता गया,
 मानवता की महक़ से महकी फ़ज़ा 
और उड़ी इंसानियत की खुशबू, 
देखो ! ईसू के त्याग  को  हर  दौर  में  पहचाना गया |

कलयुग में कुंठा का कसैलापन,
देखो ! हृदय को करता द्रवित और वक़्त को निगलता गया, 
त्यागी गयी सीता का महसूस  हुआ  दर्द ,
जीवन के हर  फेर में नारीत्व को सजाती गयी ,
देखो ! अहिल्या का सतीत्व समय के बहाव में और निखरता गया |

लाँछन न समझो जीवन में मिली अवेहलना को, 
देखो !अवगुणों के थे वे सूखे पत्ते समय के साथ झड़ते गये,
बुद्ध ने त्यागा वैभव जली यशोधरा जीवनपर्यंत ,
देखो ! त्याग की बने दोनों मिशाल हमें धैर्य का पाठ पढ़ाते गये |

- अनीता सैनी 

20 टिप्‍पणियां:

  1. लाँछन न समझो जीवन में मिली अवेहलना को,
    देखो!
    अवगुणों के थे वे सूखे पत्ते समय के साथ झड़ते गये,
    जीवन सार
    उम्दा भावाभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहे दिल से आभार दी जी |आप का अपार स्नेह यूँ ही बना रहे
      सादर

      हटाएं
  2. बहुत बहुत सुंदर और सार्थक सृजन हर पंक्ति एक संदेश देती ।
    अनुपम।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहे दिल से आभार प्रिय दी जी |आप का सानिध्य हमेशा यूँ ही बना रहे
      सादर स्नेह
      प्रणाम

      हटाएं
  3. सचमुच चरित्रहनन से बढ़ कर कोई कुकृत्य नहीं ,खासकर यदि कोई अपनी सफाई में
    कुछ कहने के लिए उपस्थित ना हो । ये ईश्वर की दृष्टि मे। अक्षम्य पाप तो कानूनन बहुत बड़ा अपराध है। अच्छा सार्थक लिखा आपने।

    जवाब देंहटाएं
  4. हर शब्द अपने आप में सार्थक संदेश देता..गहन चिन्तन के साथ उत्कर्ष भावाभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं

  5. जय मां हाटेशवरी.......
    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    25/08/2019 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में......
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  6. लाँछन न समझो जीवन में मिली अवेहलना को,
    देखो !अवगुणों के थे वे सूखे पत्ते समय के साथ झड़ते गये,
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर सार्थक जीवन का सार बताती लाजवाब प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर और सार्थक रचना सखी

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही सार्थक और सशक्त रचना

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह!प्रिय सखी ,बहुत ही उम्दा और सार्थक रचना !

    जवाब देंहटाएं