सोमवार, 16 सितंबर 2019

अमृता एक औषधि




भटक  रही दर बदर  देखो !
 स्नेह  भाव  से  बोल  रही, 
 अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,
सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|

विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,
सर्वगुणों  का  शृंगार    किये 
अमृता   कहो   या  गिलोय, 
संजीवनी  का  अवतार  लिये  |

आयुर्वेद  ने  अर्जित  की,
अमूल्य  औषधि  पुराणों  से,
महका, मानव  उपवन  अपना,
अमृता  की  झंकारों  से |

चेत  मानव  चित्त  को  अपने ,
न  खेल बच्चों की  किलकारी से,
हाथ में औषधि लिये खड़ी,
प्रकृति  जीवन पथ की पहरेदारी  में  |

- अनीता सैनी 

35 टिप्‍पणियां:

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

प्रकृति का सानिध्य हमें सुखमय जीवन का आधार प्रदान करता है.
औषधीय जड़ी-बूटियों से समृद्ध है भारत की धरती जिसके लिये जागरुक होना ज़रूरी है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (24-06-2019) को "-- कैसी प्रगति कैसा विकास" (चर्चा अंक- 3376) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

विश्वमोहन ने कहा…

प्रकृति ने मनुष्य को समस्त निधियों से आभूषित किया है। जरूरत है मनुष्य उसके साथ सहजीवी बने। गिलोय की अमृत शक्तियों से साक्षात्कार कराती सुंदर कविता।

Sheru Solanki ने कहा…

वाह वाह वाह बहूत सुन्दर

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बेहतरीन प्रस्तुति

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत सुन्दर

Unchaiyaan.blogpost.in ने कहा…

हमारी प्रकृति ने हमें अमूल्य संपदाएं दी है
और गिलोय उनमें से एक है

मन की वीणा ने कहा…

मूल्यवान जानकारी युक्त बहुत सुंदर और सार्थक अभिव्यक्ति।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 23/06/2019 की बुलेटिन, " अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की ११८ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रेणु ने कहा…

प्रिय अनीता - - तुम्हारी विशिष्ट प्रतिभा को दिखाती ये रचना सचमुच अपने आप में विशिष्ट है |आयुर्वेद में अमरबेल के नाम से विख्यात ये अमरलता अपने आप में अद्भुत विशेषताओं को समेटे है | सागरमंथन के समय मिले अमृतकलश के लिए देव - दानवों के बीच हुई छीना- झपटी में [इस कलश से ] छलकी अमृत बूंदों से यह अद्भुत औषधि अस्तित्व में आई , जो दिव्यगुणों से भरी थी और जिसे भारतवर्ष के आयुर्वेद पुरोधाओं ने अपने गहन शोध और अनुभव से त्रिदोषनाशक और सर्वगुणकारी के रूप में पहचाना | इसका उपयोग आज भी आयुर्वेदिक औषधियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है | बाबा रामदेव जी की बदौलत लगभग सभी लोग इसके गुण -धर्म से अच्छी तरह वाकिफ हैं | मुझे भी तुम्हारी रचना के बहाने से ये बात कहने का दुर्लभ अवसर मिला है, कि कई साल पहले मेरी सासु माँ को भयंकर टाईफ़ाइड हो गया था, जिसके चलते उन्हें रक्त विकार और हीमोग्लोबिन की कमी हो गयी | उसके लिए मैंने किसी की सलाह पर उन्हें सूखी पकाई गिलोय की बजाय , गिलोय की हरी डंडियाँ कूटकर उसके रस का सेवन करवाया था | ताजा डंडियों के इस रस से उनके रक्त में HB की वृद्धि से उन्हें अभूतपूर्व लाभ बहुत थोड़े से समय में मिला , जो कई दवाईयों से महीनों में भी संभव न हो पाया था | इस अमृता के दिव्य गुणों को अपनी रचना में सजाकर एक मौलिक विषयात्मक सृजन के लिए हार्दिक शुभकामनायें और बधाई | सस्नेह --

Meena sharma ने कहा…

कविता रूप में मिली उत्तम जानकारी
प्रिय अनिता, हम आपके हैं आभारी !

Meena sharma ने कहा…

मुझे सच में अब तक पता नहीं था। नाम बहुत सुना था इस बेल का।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

अनिता दी,बहुत ही उपयोगी जानकारी शेयर करने के लिए धन्यवाद।

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत ही सुंदर, ज्ञानवर्धक रचना सखी ,गिलोय के चमत्कार को हम भी अनुभव कर चुके हैं ,आर्यवेद ,जिसे हमने त्याग दिया था एक बार फिर उसे अपनाने का समय आ गया हैं।

संजय भास्‍कर ने कहा…

गिलोय के चमत्कारिक गुणों से अच्छी तरह से परिचित हूँ कविता रूप में और भी उत्तम जानकारी मिली अनीता जी

वाणी गीत ने कहा…

प्रकृति की अपनी व्यवस्थाएं हैं निरोग करने की.
आपकी कविता उस प्रकृति को नमन करती है जैसे.

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय उत्साहवर्धन टिप्णी हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

जी सही कहा सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय दी जी
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने हेतु
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार प्रिय रेणु दी जी और प्रिय मीना दी जी
आप का स्नेह और सान्निध्य यूँ ही बना रहे
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

दी जी आभारी तो मैं आप की हूँ आप ने मेरे शब्दों को इतना मान दिया आप का स्नेह यूँ ही बना रहे
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

प्रिय ज्योति बहन सस्नेह आभार
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सही कहा प्रिय कामिनी दी जी |तहे दिल से आभार आप का
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार भास्कर भाई आप का
प्रणाम
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आप का ब्लॉग पर तहे दिल से स्वागत है प्रिय सखी
सही कहा आप ने प्रतिपल प्रकृति को नमन करती मैं और मेरी रचना |आप का सान्निध्य यूँ ही बना रहे
सादर स्नेह

शुभा ने कहा…

कविता के माध्यम से बहुत अच्छी जानकारी देने के लिए आभार प्रिय सखी ।

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर स्नेह