शनिवार, 16 नवंबर 2019

आहट हुई थी उजली आस पर




हृदय पर अनहोना आभास सीये, 
यथार्थ के नर्म नाज़ुक तार पर, 
दबे पाँव दौड़ती है दावाग्नि-सी, 
ख़ुशबू-सी उड़ती है विश्वास पर, 
आहट हुई थी उजली आस पर  |

चलती है एहसास की थामे अँगुली,  
अचल अंबर-सा लिये हाथ में हाथ, 
सवार रहती है पलकों के कोरे कोर पर,  
 सुलगती है सुरम्य ताल लिये विरहनी-सी, 
एक पल के जंजाल पर, 
आहट हुई थी उजली आस पर  |

 मर्म की मोहक सौग़ात पर,  
बिखरती है समय की अकुलाहट पर, 
संग एक पल के सुकूँ के साज़ पर, 
अमूर्त मन की मूर्त  सजावट पर     
 चित्त के चैन पर डोलती है 
समय-सी यादों की सरसराहट पर, 
स्वाति नक्षत्र की बूंदों-सा आवरण गढ़े, 
कर्म की बदलती राह पर, 
आहट हुई थी  उजली आस पर  |

धड़कती है धड़कनों की सीढ़ियों पर, 
मन के छज्जे पर रहती है सवार, 
 उम्मीद का झरना लिये साँसों पर, 
कर्म का कोमल कलेवर लिये, 
अपनी ही बिसात पर, 
आहट हुई थी उजली आस पर  |

© अनीता सैनी 

40 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

ख़ुशी कैसे भी मिले बस उससे चूकना एक बड़ी भूल होगी
बहुत सुन्दर रचना

उर्मिला सिंह ने कहा…

लाज़वाब रचना 👌👌

Anita Laguri "Anu" ने कहा…

कभी कभी शब्द ही नही मिलते.. कुछ कविताएं बहुत अच्छी बन पड़ती है तारीफ के लिए शब्द भी ढूंढो तो वह लगते हैं कम पड़ जाएंगे सुंदर बिंबों का प्रयोग कविता को और भी मनमोहक बना रहा है

Meena Bhardwaj ने कहा…

प्रकृति और मन के कोमल भावों को संजो कर एक खूबसूरत शब्द चित्र.. जिसमें सुघड़ शब्द शिल्प सौन्दर्य देखते ही बनता है ।लाजवाब सृजनात्मकता अनीता जी ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-11-2019) को     "हिस्सा हिन्दुस्तान का, सिंध और पंजाब"     (चर्चा अंक- 3522)    पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
-- 
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।--डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

मन के भावों और जीवन की विभिन्न स्थितियों में कश्मकश और ऊहापोह से इतर एक स्थिति चिंतन को अकुलाहट से परे ले जाती है जहाँ शांत चित्त अपनी सुरमयी इबारत लिखता है। भावों का तारतम्य पाठक के ज़ेहन तक पहुँचकर मर्म को छू ले तो रचना क़ाबिल-ए-तारीफ़ हो जाती है। अपने तरह की अलग रचना जो अभिव्यक्ति का नवीनतम मार्ग तलाशती हुई अपने अनूठे बिम्ब उकेरती है।
बधाई एवं शुभकामनाएँ।
लिखते रहिए।

मन की वीणा ने कहा…

सकारात्मकता की उजास होते ही मन के उद्वैलित भाव धीर नीर, से हृदय तल में अदृश्य अकुलाहट को समा लेते हैं ।
बहुत ही अलहदा से भाव अलहदा सी उपमाएं अलहदा काव्य सृजन ।
अद्भुत, अभिनव।

Alaknanda Singh ने कहा…

स्वाति नक्षत्र की बूंदों-सा आवरण गढ़े,
कर्म की बदलती राह पर,
आहट हुई थी उजली आस पर |... बहुत खूब ल‍िखा है अनीता जी

Prakash Sah ने कहा…

बहुत बढ़िया...

Digvijay Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 18 नवंबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

रेणु ने कहा…

धड़कती है धड़कनों की सीढ़ियों पर,
मन के छज्जे पर रहती है सवार,
उम्मीद का झरना लिये साँसों पर,
कर्म का कोमल कलेवर लिये,
अपनी ही बिसात पर,
आहट हुई थी उजली आस पर
| हर आहट पर आरस के हार पिरोते मन की कोमल भावनाओं का सुंदर शब्दांकन हार्दिक शुभकामनायें प्रिय अनिता

Rohitas ghorela ने कहा…

सकारात्मक सोच के प्रभाव से मन के कोमल अहसासों को बखूबी बांधा है। सुंदर प्यारी सी रचना

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत रचना सखी 👌

दिगंबर नासवा ने कहा…

हर नई आहाट कुछ नया ले के आती है ... जीवन जागता है हर आहाट पर ...
गहरे एहसास से बुनी रचना है ...

SUJATA PRIYE ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना सखी।

शुभा ने कहा…

वाह!!प्रिय सखी ,बहुत ही खूबसूरत भावों से सजी रचना 👌👌

Anchal Pandey ने कहा…

वाह आदरणीया मैम 👌
भावपूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति।
सादर नमन 🙏सुप्रभात

मुकेश सैनी ने कहा…

बहुत भावपूर्ण रचना

संजय भास्‍कर ने कहा…

कर्म की बदलती राह पर,
आहट हुई थी उजली आस पर ... बहुत खूब

अनीता सैनी ने कहा…

आभारी हूँ दीदी जी आप की रचना का मर्म टटोलती सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर नमन आदरणीया उर्मिला दीदी जी अपने अमोल शब्दों से रचना का मान बढ़ाने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय अनु सुन्दर समीक्षा जो रचना का मर्म टटोलती हुई अपार स्नेह की बौछार कर रही है.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

वाह!सादर आभार आदरणीया मीना दीदी इतनी ख़ूबसूरत प्रतिक्रिया आपसे पाकर अभिभूत हूँ. आपका मनोबल बढ़ाने और रचना की समीक्षा लिखने का अंदाज़ निराला है. साथ बनाये रखियेगा.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार प्रिय सखी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

आप भी न
आभार आप का
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार आदरणीया दीदी जी
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सस्नेह आभार बहना
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीय सर पाँच लिंकों पर स्थान देने हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया कुसुम दीदी जी रचना पर मनभावन प्रतिक्रिया के साथ साहित्य की बारीकियों की ओर ध्यान आकृष्ट करने और उत्साहवर्धन करने के लिये.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सहृदय आभार आदरणीया सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत सारा आभार प्रिय आँचल जी आपकी विश्लेषणात्मक प्रतिक्रिया सभी को ख़ूब लुभाती है. साथ बनाये रखियेगा.
सादर स्नेह

अनीता सैनी ने कहा…

तहे दिल से आभार आदरणीय सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय रचना का मर्म टटोलती सुन्दर समीक्षा हेतु.
सादर

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीया रेणु दीदी जी रचना की सुंदर समीक्षा और उसके मर्म को अधिक सरल करने हेतु. आपका साथ पाकर मेरी हिम्मत लेखन में बढ़ती जाती है. साथ बनाये रखियेगा.
सादर.

अनीता सैनी ने कहा…

सादर आभार आदरणीय सर रचना पर सारगर्भित व्याख्यात्मक प्रतिक्रिया के लिये. रचना का मर्म स्पष्ट करती आपकी टिप्पणी सदैव प्रभावित करती है. आपका स्नेह और आशीर्वाद यों ही मिलता रहे.
सादर

लोकेश नदीश ने कहा…

बहुत प्यारी रचना

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत बहुत शुक्रिया सर
सादर